“बलमा जी का स्टूडियो”

अतीत और वर्तमान की ड्योढ़ी पर बैठे वर्तमान से एकदम मुंह फेरे मुझ जैसे तमाम नास्टैल्जिक पाठको के लिए कहानी “बलमा जी का स्टूडियो “हाथ पकड़कर उसी दुनिया में ले…

कविता – गुनहगारों की बस्ती

-गुनहगारों की बस्ती- माना  कि ये नहीं होते बेटा और  बेटी परंतु तुम्हारे गर्भ से जन्मी औलाद तो है न जिनके पैदा होने पर  वैसे ही उमड़ घुमड़ आँचल से…

एक करोड़ रुपए की शासकीय भूमि अवैध कब्जे से मुक्त कराई

जबलपुर – जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा नगर निगम के साथ माफिया के विरुद्ध की जा रही कार्यवाही के तहत आज आधारताल में लगभग एक करोड़ रुपये अनुमानित मूल्य की…

भारत रत्न अटल जी के जन्मदिवस पर बोले भाजपा जिलाध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पार्टी अटल जी के सपनों को साकार करने में लगी हुई है— इन्द्र शरण

सीधी ।हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं।राष्ट्रवाद के प्रणेता, विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाने वाले जन नेता…

प्रशिक्षण  सतत, अनवरत  चलने वाली  कार्यकर्ता विकास की एक प्रक्रिया है– इन्द्र शरण 

  सीधी । भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ताओं के लिए जिले के प्रत्येक मंडल में प्रशिक्षण वर्ग भाजपा जिलाध्यक्ष इन्द्र शरण सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश के निर्देशानुसार सुचारु…

पावस में खटराग बहुत है तुम ही इंतजार करते थे हम तो पहले ही कहते थे…

पावस में खटराग बहुत है तुम ही इंतजार करते थे हम तो पहले ही कहते थे पावस में खटराग बहुत है टपक रहा है घर का एक -एक  कोना- कोना…

दुःख से पहली बार मिलवाया था…तुम्हारी हंसी ने…

दुःख से पहली बार मिलवाया था तुम्हारी हंसी ने तुम्हारी उदासी ले गयी थी दर्शन की किताबों तक चालीस साल बाद भी स्पर्श का बीज -मन्त्र अजपा जाप- सा स्वचालित…

अतिशय राग बिखेर गया…आंसुओं का अंतहीन सिलसिला…

अतिशय राग बिखेर गया आंसुओं का अंतहीन सिलसिला मौन की घुटन भरी गुफा में पैर टिकाने नहीं आते आश्वस्त स्वर पथरायी आँखें बुनती हें अतीत के रुपहले ऊन से एक…

बेतार के तार बुनते सघन रिश्तों की बारीक चादर…

बेतार के तार बुनते सघन रिश्तों की बारीक चादर अदेखी उंगलियाँ रचती मखमली बेलबूटे अनमिली निगाहें फेंकती अवसादित रातों में तेज सर्च लाइट प्रामाणिक होता है हमेशा अनकहा ही अबोली…

जो नहीं है…वही है…कोई है…

जो नहीं है वही है कोई है जो शब्दों की रस्सी पकड कूद आया था कच्चे मन के अहाते में नंगे पैर खुल चुकी है रस्सी बिखर गयी हैं मात्राएँ…