डिजिटल युग में आईपीआर पर पांच दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला शुरू

देहरादून। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय देहरादून और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकार-चुनौतियाँ और अवसर विषय पर आयोजित पांच दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला का सोमवार को विधिवत शुभारंभ हुआ।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन ने कहा कि आज का दौर डिजिटल सूचना और रचनात्मक कार्यों का युग है, जिसमें शोध, रचनात्मकता और वैज्ञानिक उपलब्धियों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हो गई है। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के पेटेंट सूचना केंद्र में वैज्ञानिक हिमांशु गोयल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट के दौर में ज्ञान का आदान-प्रदान पहले से अधिक तेज और व्यापक हुआ है, लेकिन इसके साथ कॉपीराइट संरक्षण, बौद्धिक उपलब्धियों की सुरक्षा और तकनीकी प्रवर्तन भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार (प्च्त्) का प्रभावी उपयोग शोध को उद्योग से जोड़ने और नई संभावनाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. देश दीपक, रिसर्च कॉर्डिनेटर डॉ. प्रतिभा जुयाल, डॉ. पुष्पा ध्यानी, सूरज सिंह व डॉ. पात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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