उत्तराखंड में दर्ज हुआ धर्मांतरण कानून पर पहला केस, क्या है पूरा मामला?

देहरादून: उत्तराखंड में कड़े धर्मांतरण कानून को लागू किए जाने के बाद पहला केस दर्ज किया गया है। एक महिला की शिकायत पर नैनीताल जिले के रामनगर थाने में यह केस दर्ज हुआ है। कुमाऊं रेंज में यह इस प्रकार का पहला मामला है। उत्तराखंड विधानसभा ने 30 नवंबर को धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022 को अधिक कठोर रूप से लागू करने से संबंधित बिल को पास किया गया। इसके बाद कानून प्रदेश में लागू हो गया। इस नए कानून के आधार पर सोमवार को राज्य में कथित जबरन धर्म परिवर्तन का पहला मामला दर्ज किया गया। नए कानून के तहत यह कुमाऊं रेंज में अपनी तरह का पहला मामला भी है। कुमाऊं रेंज में उत्तराखंड के छह जिले शामिल हैं। एक महिला की शिकायत पर नैनीताल जिले के रामनगर थाने में साकिब सैफी उर्फ शिव ठाकुर और उसके परिवार के एक सदस्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

सैफी पर महिला से रेप करने के लिए उसकी नकली पहचान बनाने और बाद में उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया गया है। वर्ष 2017 में सैफी उसके संपर्क में आया। जब वह रामनगर के एक कॉलेज में पढ़ रही थी। फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके कथित तौर पर सोशल मीडिया पर उसका पीछा करने के बाद दोनों का अफेयर था। बाद में, जब महिला को सच्चाई का पता चला तो सैफी ने कथित तौर पर उसे पीटा और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। इसके बाद वह टूट गई।

महिला की इस साल 3 दिसंबर को किसी अन्य व्यक्ति से शादी होनी थी। लेकिन, सैफी ने कथित तौर पर लड़की के होने वाले पति के परिवार से संपर्क किया और उसे बीमार बताया। इसके कारण शादी टूट गई।

सैफी और उनके रिश्तेदारों पर केस दर्ज

सैफी और उनके चार रिश्तेदारों पर केस दर्ज किया गया है। नैनीताल के रामनगर के बंबघेर इलाके के सभी निवासियों पर आईपीसी की संबंधित धाराओं और धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसएसपी नैनीताल पंकज भट्ट ने टीओआई को बताया कि कुमाऊं क्षेत्र में इस तरह का यह पहला मामला है। लड़की की शिकायत के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

एफआईआर की कॉपी में मामले की पूरी जानकारी दी जा रही है। डीआईजी, कुमाऊं रेंज नीलेश आनंद भर्ने ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम में संशोधन के संबंध में अभी तक कोई शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ है। यह एक गंभीर मामला है और हम इसे देख रहे हैं।

 

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