हर बार चुनाव से पहले जेल से बाहर कैसे आ जाता है राम रहीम!

रोहतक: हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के आरोप में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर परोल दी गई। इस बार 30 दिनों की परोल मिली है। पिछले चार सालों में यह राम रहीम सिंह की 12वीं परोल है। अगस्त 2017 में दो शिष्याओं से बलात्कार के लिए 20 साल जेल की सजा सुनाए जाने के बाद पहली बार वह सिरसा में अपने डेरे में 10 दिनों तक रुकने वाला है। इसके बाद में वह उत्तर प्रदेश के बागपत में रहेंगे। दिल्ली चुनाव के लिहाज से यह काफी अहम मानी जा रही भी है, क्योंकि यहां डेरे से जुड़े लाखों फॉलोअर्स रहते हैं।

डेरे के वकील जितेंद्र खुराना का कहना है कि राम रहीम को क़ानूनी दायरे में परोल मिली है। 70 दिन की पैरोल और 20 दिन की फरलो हर कैदी का अधिकार है। अधिकार के तहत 30 दिन की परोल मिली है। इस बार सिरसा जाने के लिए परोल मांगी गई थी। परोल पर सवाल उठाने वाले पहले परोल का कानून पढ़ें।

पिछली बार 20 दिन की परोल दी गई

राम रहीम को पिछली बार 20 दिन की परोल दी गई थी। यह परोल पिछले साल 5 अक्टूबर को हरियाणा में मतदान से चार दिन पहले दी गई थी। अपने अनुयायियों के वोटों को प्रभावित करने की क्षमता के कारण राम रहीम को लगभग दो दशकों तक पंजाब और हरियाणा के राजनीतिक नेताओं और दलों का संरक्षण प्राप्त था। पिछली बार उन्होंने अपने पिता मगहर सिंह की पुण्यतिथि 5 अक्टूबर का हवाला देते हुए परोल मांगी थी, जिसे परमार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है राम रहीम

पिछले साल अक्टूबर से पहले हरियाणा सरकार ने उन्हें अगस्त में 21 दिन की छुट्टी दी थी, जो 2 सितंबर को समाप्त हो गई थी। राम रहीम फिलहाल राज्य की राजधानी चंडीगढ़ से 250 किलोमीटर दूर रोहतक की उच्च सुरक्षा वाली सुनारिया जेल में बंद है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने राम रहीम की अपनी दत्तक बेटियों की शादी समारोह में शामिल होने के लिए पैरोल की याचिका खारिज कर दी थी।

परोल देने के लिए क्या है नियम

बता दें कि परोल देने के लिए कोई एक समान नियम नहीं है। यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है कि वो परोल देने के लिए क्या मानदंड तय करती हैं। हालांकि कुछ सामान्य मानदंड हैं जो ज्यादातर राज्यों में लागू होते हैं। सबसे पहले परोल देने के लिए कैदी के व्यवहार को देखा जाता है। दरअसल कैदी को जेल में अच्छे व्यवहार का रिकॉर्ड होना चाहिए, यदि ऐसा नहीं है तो परोल नहीं मिलती। इसके अलावा कैदी को अपनी सजा का एक साल पूरा कर चुका होना चाहिए। साथ ही कैदी को जेल में पुनर्वास कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए और कैदी के पास समाज में वापस आने का एक कारण होना चाहिए।

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