उत्तराखंड में बाहरी लोग नहीं खरीद पाएंगे जमीन, पारित हुआ नया भूमि विधेयक

नई दिल्ली। उत्तराखंड विधानसभा में आज पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा पेश भूमि विधेयक को पास कर दिया है, जो कि उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950) संशोधन विधेयक, 2025 है। इसके नए विधेयक के चलते राज्य के 13 में से 11 जिलों में राज्य के बाहर के लोगों के कृषि और बागवानी भूमि खरीदने पर प्रतिबंध लग जाएगा और बाहरी लोग इन जिलों में कृषि के लिए जमीन नहीं खरीद सकेंगे।

जानकारी के मुताबिक, जिन दो जिलों में यह प्रतिबंध लागू नहीं है, वे हैं हरिद्वार और उधम सिंह नगर। यह संशोधन नगर निगम सीमा के बाहर भूमि खरीद पर लागू होता है। आवासीय उपयोग के लिए बिना अनुमति के 250 वर्ग मीटर भूमि खरीदने की अनुमति देने वाला प्रावधान अभी भी लागू रहेगा।

सरकार ने क्या किए हैं बदलाव?

राज्य की पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी दे दी थी। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2021 में भूमि कानूनों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने 2022 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। वर्तमान संशोधन में सरकार ने उस प्रावधान को हटा दिया है, जो अतिरिक्त भूमि – मूल अधिनियम में निर्धारित 12.5 एकड़ से अधिक – को पर्यटन, उद्योग, कृषि और अन्य उपयोगों के लिए किसी को भी हस्तांतरित करने की अनुमति देता था।

कैसे खरीदी जा सकेगी जमीन?

इसके अलावा संशोधन में कहा गया है कि भूमि खरीदने से पहले बेचने वाले को उप-पंजीयक के समक्ष एक हलफनामा प्रस्तुत करना होगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि उन्होंने या उनके परिवार ने आवासीय प्रयोजनों के लिए राज्य में कहीं भी 250 वर्ग मीटर से अधिक भूमि नहीं खरीदी है।

बता दें कि यह विधेयक पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कार्यकाल में किए गए संशोधन को पलट देता है, जिसके तहत जिला मजिस्ट्रेट को उद्योगों के लिए भूमि खरीद की अनुमति देने का अधिकार दिया गया था। साथ ही यह मूल अधिनियम में मौजूद 12.5 एकड़ की सीमा को भी बहाल करता है।

संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया है कि भूमि खरीदने से पहले संबंधित विभाग प्रस्ताव का निरीक्षण करने के बाद भूमि आवश्यक प्रमाण पत्र जारी करेगा। हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी बागवानी और अन्य उपयोगों सहित अतिरिक्त भूमि को हस्तांतरित करने का प्रावधान तभी होगा, जब संबंधित विभाग निवेश की मात्रा, रोजगार सृजन और मशीनरी के विवरण के साथ प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के बाद भूमि आवश्यक प्रमाण पत्र जारी करेगा।

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