नेपाल का निवासी भारत में चुनाव लड़ सकता है?

मौहम्मद शाह नज़र

देहरादून। भारत और नेपाल के रिश्ते हमेशा से खास रहे हैं, खुली सीमाएँ, सांस्कृतिक समानता और 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मित्रता संधि के कारण दोनों देशों के नागरिक बिना वीज़ा के आना-जाना कर सकते हैं। नेपाली नागरिक भारत में रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और संपत्ति भी खरीद सकते हैं, मगर जब बात चुनाव लड़ने की आती है, तो यहाँ नियम कड़े हो जाते हैं। भारतीय कानून के मुताबिक, नेपाल का नागरिक सीधे चुनाव नहीं लड़ सकता, इसके लिए पहले भारतीय नागरिकता लेना अनिवार्य है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 (लोकसभा) और अनुच्छेद 173 (विधानसभा) में साफ़ लिखा है, सदस्य बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए। इसके अलावा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 4 और 5 भी यही नियम दोहराती हैं।

1950 की संधि के कारण नेपाली नागरिकों को भारत में आकर बसना और लंबे समय तक रहना आसान है, लेकिन नागरिकता के लिए उन्हें नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत आवेदन करना होता है। तीन मुख्य रास्ते हैं।

1.जन्म से नागरिकता (सेक्शन 3) अगर जन्म भारत में हुआ है और माता-पिता में से कोई भारतीय नागरिक था।
2. पंजीकरण द्वारा (सेक्शन 5) 7 साल के लगातार निवास या भारतीय नागरिक से विवाह के बाद।
3. प्राकृतिककरण द्वारा (सेक्शन 6) पिछले 14 साल में से कम से कम 12 साल भारत में निवास के बाद।

नेपाल के नागरिकों को भारत में रहने, काम करने और संपत्ति खरीदने के अधिकार जरूर हैं, लेकिन राजनीतिक अधिकार, जैसे चुनाव लड़ना नागरिकता के बिना संभव नहीं। यह नियम सभी विदेशी मूल के लोगों पर समान रूप से लागू है। नेपाल का निवासी भारत में सांसद, विधायक या किसी भी निर्वाचित पद के लिए खड़ा हो सकता है, बशर्ते कि वह पहले भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ले और संविधान व जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की अन्य शर्तें भी पूरी करे। यानि, रिश्ते चाहे जितने भी नजदीकी हों, लोकतंत्र में नागरिकता की कसौटी पर खरा उतरना ही पहली शर्त है।

भारतीय संविधान अनुच्छेद 84 और 173 के मुताबिक उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (धारा 4 व 5) के तहत नागरिकता अनिवार्य।
आयु सीमा, लोकसभा/विधानसभा के लिए न्यूनतम 25 वर्ष। मतदाता सूची में नाम अनिवार्य।

नेपाली नागरिक भारत में बिना वीज़ा रह, काम और संपत्ति खरीद सकते हैं।
भारत के नागरिक भी नेपाल में यही अधिकार रखते हैं। संधि राजनीतिक अधिकार (जैसे चुनाव लड़ना) स्वतः नहीं देती। चुनाव लड़ने के लिए नागरिकता लेना जरूरी।

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