दीपशिखा गुसाईं “अब ऋतु रमणी ऐ गे ओ चेत क मेहना, भटोई की आस लगे आज सोरास बेना….” यह गीत सुन शायद सभी पहाड़ी बहिनों को अपने मायके की याद स्वतः…