“पगडण्डी”———————————– आज फिर उसी पगडण्डी से होते हुए चलती हुई उन यादों में खो जाती हूँ,,अपने गांव और गांव के नीचे बहती अलकनंदा की कलरव करती मधुर आवाज,सामने वही…