निर्धारित समय पर आयोजित की जाए नन्दा राजजात यात्रा : हरदा

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नन्दा राजजात के स्थगन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा, जो हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों से गहरे रूप से जुड़ी है, इस वर्ष स्थगित करने का निर्णय भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला हो सकता है।

हरीश रावत ने कहा,नन्दा राजजात का आयोजन उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे हर 12 साल में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह परंपरा कैलास के साथ हमारे गहरे जुड़ाव को दर्शाती है, जिसमें मां नंदा के मार्ग से कैलास की यात्रा की याद में लोग हर साल श्रद्धा से जुड़ते हैं।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2014 में जब राज्य में प्रलयकारी आपदा आई थी, तब भी नन्दा राजजात का आयोजन किया गया था और सभी तैयारियों के बावजूद यह बिना किसी बड़ी समस्या के सम्पन्न हुआ था। उस समय भी कठिन परिस्थितियाँ थीं, लेकिन जनभावना और श्रद्धा के कारण नन्दा राजजात सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस बार नन्दा राजजात के स्थगित होने के निर्णय से उनका मन विचलित है, और इसका सीधा असर लोगों के मनोबल पर पड़ सकता है। इसका कारण समझ में नहीं आता। अगर 2014 में प्रलय के बावजूद यह आयोजन हो सकता था, तो इस बार क्यों नहीं?

उन्होंने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि वह इस निर्णय पर पुनः विचार करें और नन्दा राजजात को स्थगित करने के बजाय इसे निर्धारित समय पर आयोजित किया जाए। साथ ही, रावत ने यह भी बताया कि सरकार ने इस वर्ष की नन्दा राजजात की जगह नंदा आम जात प्रारंभ करने का फैसला लिया है, लेकिन इस बदलाव पर भी स्पष्टता नहीं आई है।

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