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-मौन-
मौन मुखर प्रश्न मेरे
उत्तर विमुख हुए जाते हैं
स्याह सी रात के साए
आ उन्हें सुलाते हैं
नदिया चुप सी बहती है
चांदनी मौन में निखरती है
अंतर्मन के उथल पुथल में
मौन रच बस मचलती है
मन का कोलाहल
प्रखर हो जाता है
मौन का बसेरा मन
जब पाता है
गहरा समुद्र भी
कभी कभी मौन
हो जाता है..
एकांकी हो कर भी
चाँद सभी का कहलाता है.
~श्वेता मिश्रा~
-नाइजीरिया-