मैं तो गंगा किनारे…आता रहा। देख लहरों को गीत, गाता रहा…

मैं तो गंगा किनारे,

     आता रहा।

देख लहरों को गीत,

    गाता रहा।

सुना जो संगीत,

   लहरों का मैंने।

मैं उसी को,

    गुनगुनाता रहा।

छू के लहरों को तन-मन,

         शीतल हुआ।

मन का संताप ,मेरा हरता रहा।

   मैं तो गंगा किनारे आता रहा,

       अपने जीवन को अमृत बनाता रहा…..

 

–लेखक : दिनेश सती, ऋषिकेश–

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