सायकिल से पांच हजार किमी का सफ़र ; पर्यावरण बचाने की चिंता लिए निकल पड़ा युवक

नेशनल फ्रंटियर, बांधवगढ़।जल-जंगल-जमीन बचाने का उद्देश्य लेकर लोगों में चेतना जागृत करने सिवनी जिले के 25 वर्षीय रोहित सिरसाम सायकिल से मध्य प्रदेश के भ्रमण में निकले हैं। पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर चेतना जगाने के लिए निकले रोहित उमरिया पहुंचे। यहां नेशनल फ्रंटियर से खास बात में रोहित सिरसाम ने बताया कि उनकी अब तक पांच हजार किलोमीटर की सायकिल यात्रा (Cyclic Journey) पूरी हो चुकी है। इसमें मध्य प्रदेश के 49 जिले (District) की यात्रा पूरी हुई है। कुछ ही दिनों में अन्य शेष तीन जिले पूरे कर यात्रा का समापन (End of the Journey) सिवनी के पेंच से करेंगे।
कहां से शुरू हुई यात्रा ?:
रोहित सिरसाम जो कि मूलतः मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के हैं। इन्होंने बताया कि वे अपने गृह जिले सिवनी के पेंच से जल, जंगल और जमीन बचाने को लेकर यात्रा की शुरुआत किये हैं। अब तक यात्रा के 60 दिन पूरे कर वे कुछ दिनों में इस यात्रा का समापन पेंच से ही करेंगे। समापन के साथ ही उनके 52 जिलों की यात्रा पूरी होकर प्रदेश भृमण समाप्त हो जाएगा। लिहाज़ा रोहित ने बताया कि उनके द्वारा अभी तक 49 जिले और तक़रीबन 5 हजार कि.मी. से ज़्यादा दूरी का सफर सायकिल से तय किया जा चुका है। इसमें उनके लिए वन विभाग भी मददगार साबित हो रहा है। वन विभाग द्वारा ठहरने और कैम्पेन करने में कई जगह मदद की गई।
सायकिल से यात्रा की वजह :
पर्यावरण की चिंता लेकर सायकिल से मध्य प्रदेश भृमण पर निकले रोहित सिरसाम उमरिया जिला पहुंचे जहां उन्होंने बताया उनकी यात्रा जल, जंगल और जमीन बचाने को लेकर हर व्यक्ति और समाज में जागरूकता लाना है। प्रकृति संवारने और प्रदेश के खुशहाली के लिए जंगल और बाघ बचाने का संदेश लेकर सायकिल से भृमण पर निकले हैं। उनका कहना है कि यदि अभी से पर्यावरण के प्रति कोई ठोस कार्य नहीं किया गया तो आने वाला समय कठिनाइयों से बढ़ता चला जायेगा। प्रकृति के लिए एक पेड़ लगाना आज के समय की मांग हैं।
कैम्पेन लगाकर देते हैं सीख :
यात्रा के दौरान वे इसी बीच एक छोटा सा कैम्पेन लगाकर भी लोगों को जल, जंगल और जमीन मुद्दे पर चर्चा करते हुए जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। साथ ही एक पेड़ लगाने का आग्रह भी। प्रदेश और पर्यावरण की खुशहाली का बीड़ा उठाकर सायकिल से लोगों को सन्देश देने वाले इस 25 वर्षीय युवक का कहना है, कि यदि प्रकृति की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाला जीवन और भी संघर्षसील और कठिनाई से भरा होगा।

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