उत्तराखंड: पहले EPR से भागते रहे, अब धड़ाधड़ हो रहे रजिस्ट्रेशन

देहरादून : प्रदेश में प्लास्टिक से जुड़े उद्योगों की ओर से ईपीआर (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व) प्लान जमा कराने के काम में तेजी आई है। अब तक 278 प्रोड्यूशर, इंपोटर और ब्रांड ऑनर (पीआईबीओ) की ओर से ईपीआर जमा कराया जा चुका है, जबकि 52 प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसर्स (पीडब्ल्यूपी) कंपनियों की ओर से भी पंजीकरण कराया गया है।

बीते वर्ष ईपीआर जमा नहीं कराने वाले प्लास्टिक उद्योगाें को बंद करने के लिए नोटिस जारी होने बाद हड़कंप की स्थिति बन गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट की ओर से एसएसएमई (लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम) उद्योगाें के पंजीकरण की बाध्यता में छूट दे दी गई थी। अन्य पीआईबीओ के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया था।

उत्तराखंड में बीते दो-तीन माह में पंजीकरण कराने वाले उद्योगों की संख्या में तेजी आई है। प्रदेश में अब तक 202 प्रोड्यूशर, 13 इंपोटर और 63 ब्रांड ऑनर पंजीकरण करा चुके हैं, जो देशभर में हुए 6921 ईपीआर पंजीकरण का करीब चार प्रतिशत है। वहीं, देशभर में 2113 प्रोड्यूशर, 3477 इंपोटर और 1331 ब्रांड ऑनर ने पंजीकरण कराया है।

वित्तीय वर्ष के अंत में देना होता है पीडब्ल्यूपी का प्रमाण पत्र

पीसीबी में ईपीआर प्लान जमा करने के बाद प्लास्टिक उत्पादक कंपनियों को वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर रिसाइकिलिंग के लिए पंजीकृत प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसर्स (पीडब्ल्यूपी) कंपनियों से प्रमाण पत्र लेकर जमा करना होता है। ऐसा नहीं करने पर भी एनओसी को निरस्त किया जा सकता है। सीपीसीबी की साइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पंजीकृत पीडब्ल्यूपी कंपनियों की संख्या वर्तमान में 1768 है, जो कंपनियों से प्लास्टिक वेस्ट लेकर उसका रिसाइकिलिंग करती हैं। इसके बाद कंपनियों को इसका प्रमाण पत्र देती हैं।

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