क्या अश्लील कंटेंट देखना अपराध? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. इसको पीडियाट्रिक सर्जन संजय कुलश्रेष्ठ कोर्ट में याचिका दाखिल की. याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री न मौजूद हो. ऐसा कंटेंट यौन अपराधों को बढ़ावा देता है. याचिका के मुताबिक, मोबाइल इंटरनेट के जरिए इसे बढ़ावा मिल रहा है और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन अपराधों में बढ़ोतरी की वजह बन रहा है.

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ऐसे कंटेंट को लेकर मामला कोर्ट पहुंचा है. ऐसे में सवाल यह भी है कि भारत में अश्लील कंटेंट को देखना कितना बड़ा अपराध है? क्या कहता है देश का कानून?

क्या अश्लील वीडियो देखना अपराध है?
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आशीष पांडे कहते हैं, भारत में अश्लील सामग्री को लेकर कई कानून हैं. सजा क्या होगी, यह निर्भर करता है कि आरोपी किस तरह का कंटेंट देख रहा है और वो कहां पर देख रहा है. ये बड़े फैक्टर हैं. जैसे- अगर कोई वयस्क अकेले में सामान्य पॉर्न कंटेंट देख रहा है जो उस खास टार्गेट ग्रुप के लिए तैयार किया गया है तो यह अपराध नहीं है. इसके लिए कोई सजा नहीं है. भारतीय संविधान में प्राइवेसी से जुड़े कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिसके तहत उन चीजों पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती है जब तक ये गैर-कानूनी ना हो.

इस तरह के अश्लील कंटेंट पर मिलेगी सजा
आशीष पांडे कहते हैं, कुछ खास तरह का अश्लील कंटेंट ऐसा भी होता है, जिसे अकेले में देखना अपराध है. अगर कोई अकेले में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी या किसी महिला के साथ कुछ गलत हुआ और वो उसे देख रहा है तो यह अपराध की श्रेणी में आता है. इसके लिए आरोपी को सजा दी जा सकती है. वहीं, चाइल्ड पॉर्नोग्राफी देखने पर पॉक्सो एक्ट के तहत सजा देने का प्रावधान है.

IT एक्ट के सेक्शन 67 के मुताबिक, इस नियम को न मानने पर 3 साल की सजा दी जा सकती है. चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़ा सेक्शन 67A और 67B कहता है, अकेले में इस तरह का कंटेंट देखना अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में यह नहीं कहा जा सकता है कि मैं इसे अकेले में देख रहा था.

फोन में ऐसी तस्वीरें मिलना, सोशल मीडिया पर पोस्ट करना भी अपराध
IPC सेक्शन 292कहता है कि अगर कोई पॉर्नोग्राफी कंटेंट बनाता है या उसे बांटता है तो यह अपराध है. जैसे- इसे सीडी के जरिए रिलीज करना या वॉट्सऐप पर शेयर करना अपराध है. या फिर इसे किसी को दिखाते हैं तो सजा दी जा सकती है.एडवोकेट आशीष पांडे के मुताबिक, अश्लील कंटेंट को तैयार करना प्रतिबंधित है, फिर चाहें वो किसी भी तरह का क्यों न हो.इतना ही नहीं, किसी भी महिला पर अश्लील कंटेंट देखने के लिए दबाव बनाना भी अपराध के दायरे में आता है. सोशल मीडिया पर इसे शेयर करना भी अपराध है.

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