नई दिल्ली। स्पेस की दुनिया में अमेरिका ने बड़ा धमाका किया है। दरअसल अमेरिका मून को लेकर बड़ी रिसर्च कर रहा है। अब अमेरिकी कंपनी फायरफ्लाई एयरोस्पेस का ब्लू घोस्ट मिशन चंद्रमा के पास ही उतर गया है। यह लैंडर मारे क्रिसियम मैदान में उतरेगी, जो 345 मील चौड़े गड्ढे में जमे हुए लावा से बना है। इस मिशन को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज कार्यक्रम के तहत भेजा गया है।
775 करोड़ रुपये का मिला है कॉन्ट्रैक्ट
नासा ने फायरफ्लाई कंपनी को इस मिशन के लिए लगभग 775 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इसके तहत 10 वैज्ञानिक उपकरणों को चंद्रमा तक पहुंचाना था। अगर सभी उपकरण सफलतापूर्वक चंद्रमा पर पहुंच जाते हैं तो नासा कंपनी को कुल 840 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा लेकिन अगर मिशन असफल रहता है तब भी 775 करोड़ रुपये मिलेंगे।
इस मिशन की शुरुआत 15 जनवरी 2025 को हुई थी। इसे स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था। इसके साथ ही जापानी अंतरिक्ष एजेंसी का HAKUTO M2 मिशन भी भेजा गया था। वहीं 13 फरवरी 2025 को ब्लू घोस्ट मिशन चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा और सफल लैंडिंग के बाद 14 दिनों तक काम किया।
ब्लू घोस्ट मिशन के लैंडर की खासियत
ब्लू घोस्ट मिशन के लैंडर की खासियत यह है कि यह चारों लैंडिंग पैर और इसके बॉक्सनुमा स्ट्रक्चर में 155 किलोग्राम तक उपकरण ले जाने की क्षमता है। इसका सोलर पैनल सिस्टम 650 वॉट तक बिजली भी प्रोड्यूस कर सकता है। इसकी कम्युनिकेशन प्रणाली 6 एमबीपीएस डाउनलोड स्पीड और 2 केबीपीएस अपलोड स्पीड तक की सुविधा प्रदान करती है। यह मिशन चंद्रमा पर वैज्ञानिक रिसर्च और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अहम कदम साबित हो सकता है।
यह मिशन चंद्रमा के अंदरूनी हिस्से की 700 मील की गहराई तक जांच करेगा। कैमरे पृथ्वी की ओर देखते हुए एक्स-रे तस्वीरें खींचेंगे और यह अध्ययन करेंगे कि अंतरिक्ष का मौसम पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ कैसे संपर्क करता है। वहीं एक अलग कैमरा चंद्रमा की सतह पर उतरते समय लैंडर की विस्तृत तस्वीरें लेगा ताकि भविष्य के चंद्रमा मिशनों में सहायता मिल सके।