नई दिल्ली: भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम (Startup Ecosystem) तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार भी स्टार्टअप्स को खूब प्रमोट कर रही है. अभी देश में स्टार्टअप्स की संख्या 1.68 लाख से भी अधिक हो चुकी है, लेकिन फिर भी आए दिन भारत की तुलना चीन से करते हुए हमें कमतर आंका जाता है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में एक सवाल ये उठता है कि क्या भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम चीन से कमजोर है? अगर हां तो फिर दुनिया भर में स्टार्टअप ईकोसिस्टम की रैंकिंग में हम उनसे ऊपर कैसे?
इन दिनों भी सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही इमेज वायरल हो रही है, जो एक ऐसी तस्वीर दिखा रही है कि भारत की तुलना में चीन का स्टार्टअप ईकोसिस्टम बेहतर है. जोहो के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने भी इसे अपने एक्स हैंडल के जरिए शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी है. उन्होंने लिखा- ‘मुझे यह इमेज फॉर्वर्ड की गई है, जो भारत और चीन के स्टार्टअप ईकोसिस्टम की तुलना दिखाती है. चीन वह सब कुछ करता है जो भारत करता है (फिनटेक, एडटेक..), लेकिन चीन डीप टेक में भी खूब निवेश कर रहा है. हमें भी डीपटेक में निवेश करने की जरूरत है. यह अवेयरनेस तेजी से फैल रही है और मैं इसे लेकर काफी सकारात्मक हूं कि ऐसा जरूर होगा.’
भारत और चीन के स्टार्टअप्स की तुलना में जो पोस्ट वायरल हो रही है, वह बहुत सारे फैक्ट लोगों को नहीं दिखा पा रही. आइए दोनों की तुलना करते हुए जानते हैं किन मामलों में कौन है आगे.
दुनिया में स्टार्टअप ईकोसिस्टम की रैंकिंग
स्टार्टअप्स का डेटा मुहैया करने वाले प्लेटफॉर्म Tracxn के मुताबिक दुनिया भर के स्टार्टअप ईकोसिस्टम में भारत का स्टार्टअप ईकोसिस्टम तीसरे नंबर पर है. पहले नंबर पर अमेरिका है, जबकि दूसरे नंबर पर यूके है. यानी रैंकिंग के मामले में तो भारत चीन से आगे है.
स्टार्टअप्स की संख्या
स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक भारत में 31 मार्च 2025 तक कुल 1,68,538 रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं. वहीं Tracxn के मुताबिक चीन में अभी तक कुल स्टार्टअप करीब 98 हजार हैं. यानी स्टार्टअप्स की संख्या के मामले में भारत चीन से आगे है.
स्टार्टअप फंडिंग
साल 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के स्टार्टअप्स ने पिछले 9 सालों में करीब 131 अरब डॉलर यानी लगभग 11.20 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग उठाई है. वहीं Tracxn के मुताबिक चीन के स्टार्टअप्स ने अब तक करीब 1010 अरब डॉलर यानी लगभग 86.42 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग उठाई है. यानी फंडिंग के मामले में भारत अभी चीन से बहुत पीछे है. चीन के स्टार्टअप्स ने भारतीय स्टार्टअप्स की तुलना में करीब 8 गुना ज्यादा फंडिंग उठाई हुई है.
यूनिकॉर्न्स की संख्या
भारत में अभी करीब 119 यूनिकॉर्न हैं. इसी साल बेंगलुरु का डीपटेक स्टार्टअप Netradyne यूनिकॉर्म क्लब में शामिल हुआ है. पिछले साल यानी 2024 में एआई सेक्टर में Krutrim यूनिकॉर्म की लिस्ट में शामिल हुआ, जो भाविश अग्रवाल का स्टार्टअप है. वहीं ईवी सेक्टर में काम करने वाली कंपनी एथर एनर्जी और मोबिलिटी सेक्टर में रैपिडो भी इसी साल यूनिकॉर्न बनी. वहीं अगर चीन की बात करें तो Tracxn के मुताबिक वहां करीब 245 यूनिकॉर्न हैं. यह संख्या भारत के यूनिकॉर्न्स की तुलना में दोगुनी से भी बड़ी है. यानी यूनिकॉर्न्स के मामले में चीन हमने आगे है.
10 हजार से ज्यादा डीपटेक स्टार्टअप्स
भारत और चीन की तुलना करने वाली जो इमेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है जैसे भारत में डीप टेक पर कोई काम ही नहीं हो रहा. श्रीधर वेंबू ने भी अपनी पोस्ट में डीपटेक पर फोकस बढ़ाने की बात की है. हालांकि, तस्वीर थोड़ी अलग है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 10 हजार से भी ज्यादा डीप टेक स्टार्टअप हैं. वहीं भारत सरकार ने इन्हें प्रमोट करने के लिए ‘नेशनल डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी’ भी बनाई है. अगर चीन की बात करें तो Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक वहां करीब 6,444 डीपटेक स्टार्टअप हैं.