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सीधी जिले के जनकपूर ग्राम में शूरू हुई अश्वगंधा की खेती, आप भी जानिये इसकी लागत और लाभ

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
16/08/20
in राष्ट्रीय
सीधी जिले के जनकपूर ग्राम में शूरू हुई अश्वगंधा की खेती, आप भी जानिये इसकी लागत और लाभ
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प्रदीप तिवारी की रिपोर्ट


सीधी l प्रगति संस्था के प्रमुख विनोद साहू एवं  संस्था के ब्लॉक कॉर्डिनेटर शिवम मिश्रा ( जो एग्रीकल्चर से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है) ने अश्वगंधा की विधिवत जानकारी किसानों को दी और अन्य फसलों के लाभ और हानि के बारे में बताया l जिसमें पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को ट्रायल के रूप में अश्वगंधा के बीज प्रदान किया गया l जिससे औषधीय फसलों की खेती कर किसान अधिक लाभ कमा सकते है l साथ ही ये संस्था किसानों को खेती से लेकर फसल को बाजार तक पहुंचाने में पूरी मदद करेगी l जिससे किसानो को फसल बाजार तक पहुंचाने मे दिक्कत न आये और पूरा लाभ किसानो को मिल सके।

सीधी जिले के जनकपूर ग्राम के किसानो ने भी औषधीय खेती की ओर अपना रूख कर कुछ नया करने का तरीका अपनाया है और अपनी आमदनी दुगनी करने का साधन बनाने में जुट गए है l इसके लिए उनके द्वारा नए आयामों में प्रयास किए जा रहे है। जिसके अंतर्गत प्रगति फाउंडेशन के नेतृत्व में किसानों को औषधीय फसल अश्वगंधा की खेती जिले में पहली बार करवाया जा रहा है तथा गांव के किसान इसे खेती के लिए अवसर का रूप मान रहे है।

अश्वगंधा की खेती

जिसमें नवाचार के रूप में अशोक कुशवाहा (पेेशेे सेे ठेकेदार ) ने सर्वप्रथम औषधि खेती करने का कार्य आरंभ किया है l इन्होंने सर्वप्रथम अपनी 1 एकड़ भूमि पर अश्वगंधा की खेती कर उसके द्वारा होने वाले लाभ का आंकलन कर किसानों को इस औषधीय के प्रति जागरूक करेंगे l जिससे किसानों को आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके और किसान ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सके।

वर्तमान समय में औषधियों का उपयोग कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है इसके चलते इसकी उत्पादन की भी जरूरत बढ़ गई है l जिसके कारण इस फसल की जो बाजार में भाव है, उसके अनुसार सही उत्पादन हुआ तो 1 एकड़ से 50000 से 1 लाख रुपये तक की इनकम हो सकती है।

अश्वगंधा की खेती
अश्‍वगंधा

अश्‍वगंधा से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य

वानस्पतिक नाम: विथानिया सोमनिफेरा
वंश: सोलेनेसी
संस्‍कृत नाम: अश्‍वगंधा, वराहकर्णी और कमरूपिणी l
सामान्‍य नाम: विंटर चेरी, भारतीय जिनसेंग, असगंध l
उपयोगी भाग: अधिकतर अश्‍वगंधा की जड़ और पत्तियों का इस्‍तेमाल किया जाता है लेकिन इसके फूल और बीज भी उपयोगी हैं।
भौगोलिक विवरण: अश्‍वगंधा अधिकतर भारत के शुष्‍क प्रदेशों (प्रमुख तौर पर मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान) के अलावा नेपाल, अफ्रीका और मध्य पूर्व में पाई जाती है।

अश्वगंधा के पौधे अत्यंत शाखित, सदाबहार तथा झाड़ी नुमा पौधे होते है l पत्तियां रोमयुक्त, अंडाकार होती हैं, इसका फल बेरी जो कि मटर के समान दूध युक्त होता है l अश्वगंधा की जड़ों में 0.13-0.31% तक एल्केलायड की सांद्रता पाई जाती है इसमें महत्वपूर्ण विदानिन्न एल्केलायड होता है

औषधीय उपयोग

अश्वगंधा पौधे के फायदे क्या है ओर बाजार मे डिमांड

कैंसर कोशिकाओं को खत्म करें- अश्वगंधा पौधा कैंसर की कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक होता है, ऐसा देखा गया है कि कैंसर की दवाएं कैंसर कोशिकाओं के साथ अच्छी कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है l ऐसे में आप इन दवाओं के साथ अश्वगंधा के पौधे का प्रयोग करके बहुत फायदा महसूस कर सकते हैं।

चर्म रोग दूर करें- अश्वगंधा पौधे का उपयोग चर्म रोग को दूर करने के लिए भी कर सकते हैं इससे चर्म रोग से छुटकारा मिल जाता है यदि कोई चर्म रोग से पीड़ित है तो उससे अश्वगंधा का चूर्ण बनाकर तेल के साथ लगाने से चर्म रोग में छुटकारा मिलता है।

उच्च रक्तचाप की समस्या को नियंत्रित करें- उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीज को अश्वगंधा पौधे की जड़ का सेवन करना चाहिए l इसके लिए अश्वगंधा के चूर्ण को दूध के साथ रोजाना सेवन करेंगे तो उच्च रक्तचाप नियंत्रण मे रहेगा।

सांस संबंधी रोगों में फायदेमंद- सांस संबंधी रोगो से निजात पाने के लिए अश्वगंधा बहुत फायदेमंद होता है इसके लिए अश्वगंधा के क्षार एवं शहद के साथ मिलाकर पीने से इस समस्या से राहत मिलेगी।

निरोग रखें शरीर- अश्वगंधा पौधे की पत्तियों के द्वारा आप शरीर की सूजन शरीर पर पड़े घाव जख्म भरने जैसी समस्याओं को दूर कर सकते हैं इसका लेप बनाकर भी सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन कम हो जाती है इसके साथ ही अश्वगंधा पौधे की पत्तियों को घी शहद पीपल आदि के साथ मिलाकर खाने से शारीरिक बीमारियों में फायदा मिलता है

अश्वगंधा के लिए उपयुक्त जलवायु

अश्वगंधा के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट अथवा हल्की लाल मृदा जिस का पीएच मान 7.5 से 8 हो व्यवसाय खेती के लिए उपयुक्त होता है यह पछेती खरीफ फसल है ओर बीज के लिए रबी फसल उपयुक्त है। पौधों के अच्छे विकास के लिए 20 से 35 डिग्री तापमान 500 से 750 100 मिलीग्राम वार्षिक वर्षा होना आवश्यक है ।

अपने जिले में अश्वगंधा के लिए उपयुक्त मृदा है। अधिकांश जगहों का पीएच मान अश्वगंधा के लिए उपयुक्त है l अगर ऐसा कोई क्षेत्र जहां  पर मृदा परीक्षण के बाद उपयुक्त नहीं मिलता है उसके लिए जैविक ट्रीटमेंट के माध्यम से दूर कर सकते है।

जो भी किसान औषधीय खेती करना चाहते है। इसकी निशुल्क जानकारी प्रगति संस्था द्वारा दी जा रही है और इन नए आयमो से जुड़कर आप अधिक से अधिक लाभ उठा सकते है ।

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