Friday, March 6, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home लेख

आवास नीति और नीयत से हल होगी बनभूलपुरा

फ्रंटियर डेस्क by फ्रंटियर डेस्क
01/03/26
in लेख
आवास नीति और नीयत से हल होगी बनभूलपुरा
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

बिन्दु खत्ता और ऋषिकेश जैसी बस्तियों की आवास समस्याएं

इस्लाम हुसैन

24 फरवरी को बनभूलपुरा मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के बाद और अंतरिम आदेश के बाद बनभूलपुरा रेलवे जमीन के मामले में नैनीताल ज़िला प्रशासन की हाई लेवल बैठक में क्या तय हुआ यह अभी नहीं पता चला है। यह ज़रूर पता चला है कि प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की कार्ययोजना पर विचार विमर्श किया।

कैंप कार्यालय हल्द्वानी में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में भारतीय रेलवे, नगर निगम, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, ग्राम्य विकास विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के समयबद्ध और प्रभावी अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया। हालांकि बैठक होने तक अंतरिम आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं हुई थी। जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया है कि न्यायालय के आदेश की आधिकारिक प्रति प्राप्त होने के बाद सभी विभाग इस मामले में आपसी समन्वय स्थापित करेंगे और निर्धारित अवधि के भीतर उन्हें सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करेंगे। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस फैसले के बाद उन दावों सबूतों तर्कों का अब कोई महत्व नहीं रह गया है जो इस बारे में किए गए थे, यह दावे लीज़ लैंड की वैधानिकता, रिहाईश के दावे, जमीन के पट्टे, जमीन खरीदने के सबूत जमीन हस्तांतरण, अब इनका कोई महत्व नहीं है, अब यह महत्वपूर्ण है कि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जनवरी 23 से और अब तक क्या कहा है।

हालांकि कोर्ट ने रेलवे के दावों को मान लिया है जिसमें हल्द्वानी में देहरादून राजधानी से बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की रेलवे स्टेशन/सुविधाए बनाने की बात है। हल्द्वानी से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर लालकुआं को राज्य का सबसे बड़ा रेल सुविधाओं वाला स्टेशन बनाने से भी रेलवे संतुष्ट नहीं लगता है।

बनभूलपुरा जिस जगह बसा है उसमें कुछ जगह राज्य सरकार की थी, वो जगह राज्य सरकार ने रेलवे को देने का फैसला कर लिया, बाकी जिन्होंने उस इलाके में ज़मीन खरीदी थी और जिनके पास दस्तावेज और पट्टे हैं उन्हें मुआवजा देने की बात है।

इस पूरे प्रकरण में रेल सुविधाओं का क्या ठोस प्लान है, और 2007 में रेलवे द्वारा ली गई 10 एकड़ जमीन का उपयोग अब तक क्यों नहीं हुआ। यह विचारणीय बिंदु नहीं रहे बस एक ही बात है, बनभूलपुरा रेलवे सुविधाओं के लिए खाली हो।

अब मुद्दा बनभूलपुरा के बाशिंदों को बसाने का है। जिनको आर्थिक आधार पर आवास सुविधा देने पर विचार करने के निर्देश हैं। और जिसके लिए सरकार के ठोस प्रस्ताव और कार्ययोजना पर अगली सुनवाई में विचार होना है।

इस प्रस्ताव में सबसे बड़ा बिंदु जमीन की उपलब्धता का है जैसा कि कोर्ट ने पहले कहा था कि यहां के बाशिंदों को 5 किलोमीटर के दायरे में बसाया जाए।

तब यह एक ऐसी सीमा है जो गले की हड्डी बनी हुई है, क्योंकि जैसा अब कहा जा रहा है कि बाशिंदों को प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कल्याणकारी योजनाओं के अन्तर्गत बसाया जाए/जाएगा। जबकि इन योजनाओं की पहली शर्त लाभार्थी के नाम/पास जमीन का मालिकाना हक़ होना चाहिए। इस आधार पर तो यह बाशिंदे योजना के पात्र नहीं हो सकते, क्योंकि बनभूलपुरा पर कोर्ट के फैसले के बाद वो वैसे ही वो भूमिहीन/भूमि रहित हो गए हैं।

अब इस समस्या का एक ही समाधान है कि सरकार दयानतदारी दिखाए। क्योंकि बनभूलपुरा में जो सरकार की जमीन है जिसे सरकार ने रेलवे स्टेशन विस्तार/रेल सुविधाओं के लिए रेलवे को देने का प्रस्ताव कर दिया है, तब सरकार पर इन बाशिंदों के लिए ज़मीन की व्यवस्था करना लाजिमी हो गया है, जिसपर सरकार बनभूलपुरा के प्रभावित करीब 4500 परिवारों के लिए टाउनशिप बनाए।

जिसके लिए दो विकल्प हो सकते हैं। पहला तो यह कि राज्य सरकार ने उधम सिंह नगर में हाल ही में प्राग फार्म की करीब 2 हजार एकड़ जमीन पर कब्जा लिया था। वो जमीन प्राग फार्म से सीलिंग में निकली थी और जिसको लेकर पिछले कई दशकों से मुकदमे चल रहे हैं। प्राग फार्म के मालिकों की अपील खारिज होने के बाद यह भूमि सरकार ने अपने कब्जे में ले ली है।

यह उल्लेखनीय है कि इस जमीन को भूमिहीनों में बांटने के लिए भूमिहीनों ने लम्बे आंदोलन किए थे, और एक समय में यह भी सहमति बनी थी कि बिंदु खत्ता की वन भूमि से लोगों का कब्जा हटाकर उन्हें प्राग फार्म/अन्य बड़े जमीन मालिकों से सीलिंग में निकली जमीन पर बसाया जाए। अब यह ज़मीन सरकार के पास है तो सरकार इस जमीन पर बनभूलपुरा के सभी बाशिंदों को एक नज़र से देखते हुए उनके लिए टाउनशिप बनाए।

जिसके लिए कोर्ट से 5 किलोमीटर की सीमा हटाने का अनुरोध करे इसके अलावा बनभूलपुरा के लोगों को बनभूलपुरा और हल्द्वानी का मोह छोड़ने के लिए राजी करे।

दूसरी संभावना यह है कि कोर्ट के इस निर्णय के परिप्रेक्ष्य में सरकार अपनी ज़मीन और आवास नीति बनाकर सभी बस्तियों (जिनमें मलिन बस्तियों से लेकर वन बस्तियां शामिल हैं) का नियमितीकरण करे। उनकी जमीन को राजस्व जमीन में नोटीफाइड करके उन बस्तियों को नियमित करे।

इस क्रम में बिन्दु खत्ता और ऋषिकेश की गोपुरी/ऋषिकुल की जमीन सहित अनेक बस्तियों के निवासियों को अधिकार मिल जाएगा। यहां यह भी बताया जाना ज़रूरी है कि बिन्दु खत्ता को राजस्व गांव करने का सरकार का वादा भी था। 2011 में और बाद में सरकार की घोषणा को हाल ही में विलोपित/वापस किया गया है। जिससे बिन्दु खत्ता की जनता आंदोलनरत है। हाल ही में इस बारे में रैली और सम्मेलन हो चुके हैं। यही स्थिति ऋषिकेश की भी है जहां पिछले दिनों कोर्ट के अन्तरिम आदेश के बाद रेल रोको, विरोध प्रदर्शन, पथराव और गिरफ्तारियां हुई थीं।

ऐसी बस्तियों की समस्या (बिन्दु खत्ता तथा अन्य वन बस्तियों के निवासियों) को आवास अधिकार देने के लिए वनाधिकार कानून का भी सहारा लिया जा रहा था, लेकिन स्पष्ट नीति, कार्ययोजना और नीयत के अभाव के कारण इसके अपेक्षित परिणाम नहीं निकले हैं। जिससे हजारों भूमिहीनों में नीतियों के प्रति अविश्वास हो रहा है।

इस कानून से इस बड़ी समस्या के हल होने की संभावना नहीं दिखती। अगर सरकार इस ओर बड़ी पहल करे तो अनेक बस्तियों सहित बिन्दु खत्ता और ऋषिकुल के निवासियों के आवास के अधिकार और जमीन नियमितीकरण की मांग पूरी हो सकती है और इसी से बनभूलपुरा के बाशिंदों की आवास समस्या भी हल हो सकती है।

अगर सरकार यह आवास नीति की नीयत बनाए तो बिन्दुखत्ता, और गौलापार क्षेत्र की बागजाला वगैरह की अनेक बस्तियों के नियमितीकरण से उत्तराखंड‌ के हजारों लोगों को जमीन और आवास का अधिकार मिल जाएगा। बनभूलपुरा के बाशिंदों की टाउनशिप के लिए बागवाला से जुड़ी जमीन आसानी से मिल सकती है। यह उल्लेखनीय है कि बनभूलपुरा के निवासियों के आवास की समस्या 2-3 हजार एकड़ जमीन में पूरी हो जाएगी।

यह ज़रूरत अन्य बस्तियों के सापेक्ष, जैसे बिन्दु खत्ता में करीब 10 हजार एकड़ और ऋषिकुल करीब 30 हजार एकड़ के सामने कुछ भी नहीं है। यह ध्यान रहे कि जिस तरह उत्तराखंड बनने के बाद सार्वजनिक हित कामों के लिए हजारों एकड़ ज़मीन ली जा चुकी है, (अकेले हल्द्वानी में सैकड़ों एकड़ ली गई है) तो लोगों की आवास समस्या दूर करने, नई टाउनशिप बनाने और शहरों के विस्तार के लिए वन भूमि ली जा सकती है। वन भूमि कोई पवित्र भूमि नहीं रही है।

अन्यथा जैसे जमीन के अभाव और जमीनों के स्पष्ट मालिकाना हक/कब्जे के बिना बीस सूत्रीय कार्यक्रम से लेकर इन्दिरा गांधी आवास योजना की दुर्गति हुई वैसे ही इस फरमान की भी होगी। इस समाधान के अलावा और कोई न्यायपूर्ण और सम्मानजनक और गरिमामय समाधान नहीं हो सकता।

(इस्लाम हुसैन उत्तराखंड के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं में से एक हैं। 1980 के दशक से वे भूमिहीनों की आवास की समस्या पर लिखते रहे हैं।)

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .