बिहार में यूं ही नहीं हो रहा कैबिनेट विस्तार, लालू-तेजस्वी कैसे ढूंढेंगे काट?

पटना: बिहार में चुनावी बयार बहने लगी है. सियासी हलचल भी तेज है. वजह है नीतीश सरकार का कैबिनेट विस्तार. जी हां, आज बिहार में चुनाव से पहले नीतीश कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है. दिल्ली के बाद अब बिहार फतह पर एनडीए की नजर है. बिहार चुनाव से पहले इस कैबिनेट विस्तार को एनडीए की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार में नए-नए मंत्री बनाए जाने की कवायद शुरू हो गई है.

सूत्रों की मानें तो बिहार की नीतीश कुमार कैबिनेट में 7 नए चेहरे को जगह मिल सकती है. बिहार में 28 फरवरी से बजट सत्र की शुरुआत होने वाली है. ऐसे में आज शाम होने वाला कैबिनेट विस्तार काफी अहम है. इसकी कई वजहें हैं. एक तो यह नीतीश का कम और भाजपा का कैबिनेट विस्तार ज्यादा लग रहा. दूसरी बात यह कि इसमें ऐसे-ऐसे जातीय समीकरण साधे गए हैं, जिनका काट ढूंढना लालू यादव और तेजस्वी के लिए मुश्किल हो जाएगा.

भाजपा कोटे से 7 मंत्री

सबसे पहले जानते हैं कि बिहार में कैबिनेट विस्तार में क्या होगा. दरअसल, आज नीतीश कुमार कैबिनेट का विस्तार हो रहा है. इसमें भाजपा कोटे से 7 नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं. अब यह नीतीश का कैबिनेट विस्तार कम और भाजपा का ज्यादा लग रहा है. कारण कि मंत्रिमंडल विस्तार में सभी सात चेहरे भाजपा के ही होंगे. वर्तमान में बिहार मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री समेत 30 मंत्री हैं. BJP के 16 मंत्री हैं, जिनमें दो उप-मुख्यमंत्री शामिल हैं.

JDU से 13 मंत्री हैं, जिनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं. एक मंत्री HAM (S) से और एक निर्दलीय विधायक भी मंत्री हैं. संख्या बल के हिसाब से कुल 36 मंत्री हो सकते हैं. इसका मतलब है कि अभी छह पद खाली हैं. हालांकि, बिहार भाजपा चीफ दिलीप जायसवाल भी इस्तीफा देने वाले हैं. ऐसे में सात पद खाली हो जाएंगे.

किस जाति से कौन चेहरा

अब जानते हैं कि कौन-कौन चेहरे कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि बिहार मंत्रिमंडल में आज सात नए चेहरों को जगह मिलेगी. इसके साथ ही बिहार में कुल मंत्री पद भर जाएंगे. अब जानते हैं

कौन-कौन हैं ये चेहरे और उनकी जाति क्या है.

  1. कृष्ण कुमार मंटू पटेल- कुर्मी
  2. जीवेश मिश्रा- भूमिहार
  3. संजय सरावगी- वैश्य
  4. मोतीलाल प्रसाद- तेली
  5. राजू सिंह- राजपूत
  6. विजय कुमार मंडल- केवट
  7. सुनील कुमार- कुशवाहा

किस जाति की कितनी आबादी

  • कुशवाहा समाज-4.27 फीसदी
  • कुरमी समाज- 2.87 फीसदी
  • तेली समाज- 2.81 फीसदी
  • भूमिहार समाज-2.8 फीसदी
  • राजपूत समाज-3.45 फीसदी
  • मल्लाह (केवट) समाज- 2.60 फीसदी

भाजपा का बड़ा दांव

कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने गजब का दिमाग लगाया है. उसने चुनाव से पहले सभी जातियों को साधने की कोशिश की है. लालू यादव और तेजस्वी यादव जिस वोट बैंक को साधते रहे हैं, उसमें भाजपा की सेंध लगाने की कोशिश है. केवल माई यानी मुसलमान और यादव ही राजद को वोट नहीं करते. बल्कि राजपूत वोट बैंक भी राजद का लोयल वोट बैंक रहा है. इसके अलावा, ओबीसी जातियां भी लालू यादव को लंबे समय से वोट देती रही है. ऐसे में भाजपा का यह बड़ा दांव है.

तेजस्वी-लालू की बढ़ेगी टेंशन

दरअसल, भाजपा को लेकर बिहार में एक बड़ा परसेप्शन रहा है. वह यह कि भाजपा अगड़ों की पार्टी है. भाजपा इस कैबिनेट विस्तार से इस परसेप्शन को तोड़ने में एक और कदम बढ़ा चुकी है. भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि उसके लिए सब बराबर है. वह हर जाति और समुदाय को उचित मौका देती है. यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले बिहार में नए चेहरों को जगह दी जा रही है. इसमें उनकी जातियों का खयाल रखा गया है. भाजपा का यह कदम तेजस्वी यादव और लालू यादव के लिए किसी बड़ी टेंशन से कम नहीं है.

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