“25 नवम्बर “ -गढ़वाल में जी हाँ आज “ईगास बग्वाल” है- हम पहाडी/गढ़वालियों का महत्वपूर्ण त्यौहार, कुछ यादें फिर पहाड़ की ताजा हो जाती हैं,,और जब बात त्योहारों की हो…
-प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं का मंचन, रो उठे दर्शक- जहां कोरोना के चलते नाट्य प्रस्तुतियां स्वप्न हो गई थी वही इस नाटक की प्रस्तुति से नाटक जगत में…
मनोज रौतेला की रिपोर्ट : अल्मोड़ा/देहरादून : अल्मोड़ा एक ऐसा नाम जिसे हर कोई देश -विदेश में जानता हैं. अपने सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प के साथ अपने परम्परागत भोजन के…
“लोकतन्त्र के हत्यारे मुझे ठीक नहीं जान पड़ते! “क्यों? “वे बेचारे बार-बार हत्या करते हैं, और लोकतन्त्र हर बार जिन्दा हो जाता है! अब बताइए भला, ये भी कोई हत्या…
“लेखक हैं?” “जी।” “क्यों, अब्बा लेखक थे?” “नहीं।” “फिर आप लेखक कैसे हुए?” “अब्बा बनाकर!” “मतलब?” “मतलब यह कि लेखक होने के लिए मैंने एक लेखक को अब्बा बनाया।” “वाह!!…
“सैर कर दुनिया की ग़ालिब जिन्दगानी फिर कहां! जिन्दगानी ग़र रही तो, नौजवानी फिर कहां!!” इसी के साथ हम शुरुआत करेंगे बंबई नगरी के वैज्ञानिक विश्लेषण का। बंबई शब्द का…