कोई हद्दे निगाह है अब तक एक प्यारा गुनाह है अब तक ~गजल~

कोई हद्दे निगाह है अब तक एक प्यारा गुनाह है अब तक। जिसको चूमा था उसने हौले से वो हथेली सियाह है अब तक। कतरे कतरे में इश्क ज़िंदा है…

कितना भी बांट लो ये मोहब्बत न जाएगी ~गजल~

कितना भी बांट लो ये मोहब्बत न जाएगी हाथों में लिए हाथ ये संगत न जाएगी। साहिर के लफ्ज़ हों कि खय्याम की धुन हो जो बस गयी है रूह…

“25 नवम्बर ” गढ़वाल में जी हाँ आज “ईगास बग्वाल” है

“25 नवम्बर “ -गढ़वाल में जी हाँ आज “ईगास बग्वाल”  है- हम पहाडी/गढ़वालियों  का महत्वपूर्ण त्यौहार, कुछ यादें फिर पहाड़ की ताजा हो जाती हैं,,और जब बात त्योहारों की हो…

प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं का मंचन, रो उठे दर्शक

-प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं का मंचन, रो उठे दर्शक- जहां कोरोना के चलते नाट्य प्रस्तुतियां स्वप्न हो गई थी वही इस नाटक की प्रस्तुति से नाटक जगत में…

उत्तराखण्ड :कंक्रीट के शहर के बीच आजकल पूरे यौवन में है रंगीली “बोगुन वेलिया” का हुस्न-पढ़िए…

मनोज रौतेला की रिपोर्ट : अल्मोड़ा/देहरादून : अल्मोड़ा एक ऐसा नाम जिसे हर कोई देश -विदेश में जानता हैं. अपने सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प के साथ अपने परम्परागत भोजन के…

परीक्षाओं का दौर

दीपशिखा गुंसाईं l आजकल बच्चों की परीक्षाओं का दौर चल रहा है। वैसे तो हमें अपने पूरे जीवन काल में हर मोड़ पर कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना होता…

देश में ये विरोध आखिर किसके लिए और क्यों?

ये संसार अब बच्चों व जानवरों जैसी निरीह चेतना वाले लोगों के लिए रहने लायक नहीं रहा, यहां केवल वही रह सकता है जिसकी चेतना चिकने घड़े से आच्छादित हो!…

लोकतन्त्र हर बार जिन्दा हो जाता है!

“लोकतन्त्र के हत्यारे मुझे ठीक नहीं जान पड़ते! “क्यों? “वे बेचारे बार-बार हत्या करते हैं, और लोकतन्त्र हर बार जिन्दा हो जाता है! अब बताइए भला, ये भी कोई हत्या…

तो उस लेखक के अब्बा लेखक रहे होंगे?

“लेखक हैं?” “जी।” “क्यों, अब्बा लेखक थे?” “नहीं।” “फिर आप लेखक कैसे हुए?” “अब्बा बनाकर!” “मतलब?” “मतलब यह कि लेखक होने के लिए मैंने एक लेखक को अब्बा बनाया।” “वाह!!…

बहरहाल- बंबई

“सैर कर दुनिया की ग़ालिब जिन्दगानी फिर कहां! जिन्दगानी ग़र रही तो, नौजवानी फिर कहां!!” इसी के साथ हम शुरुआत करेंगे बंबई नगरी के वैज्ञानिक विश्लेषण का। बंबई शब्द का…