इस नाम से बाजार में बिकेगी DRDO की एंटी कोविड-19 दवा, 990 रुपये होगी कीमत

नई दिल्ली l हैदराबाद की दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लैब ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन या डीआरडीओ (DRDO) की कोरोना दवा 2DG को कमर्शियली लॉन्च कर दिया है। इसका नाम और कीमत भी तय कर दी गई है। डीआरडीओ की बनाई गई एंटी कोविड-19 दवा को खुले बाजार में 2डीजीटीएम (DGTM) नाम से बेचा जाएगा। कोरोनावायरस दवा के एक सैशे की कीमत ₹990 होगी।

मई में मिली थी हरी झंडी
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) ने एक ऐसी दवा के आपातकालीन उपयोग की इजाजत दे दी है जो कोरोना संक्रमण से लड़ने में मददगार है। इस दवा को 2-deoxy-D-glucose (2-DG) नाम दिया गया है। इसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की ओर से भी हरी झंडी मिल गई है। हैदराबाद की प्रमुख दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लैब्स (Reddys Labs) इस दवा को बना रही है।

सरकारी संस्थान को सब्सिडी
डॉ रेड्डीज लैब ने कहा है कि शुरुआत में कंपनी 2DG दवा को देश के महानगरों में मौजूद हॉस्पिटल और बड़े शहरों में बेचेगी। बाद में धीरे-धीरे 2DG को देश के अन्य इलाकों में भी इसे बेचा जाएगा। डॉ रेड्डीज लैब का कहना है कि 2डीजी में 99.5% प्योरिटी है और इसे 2DG नाम से कमर्शियल तौर पर बाजार में उतार दिया गया है। 2dg की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) ₹990 तय की गई है। सरकारी संस्थानों को 2dg की डोज सब्सिडी वाली दरों पर मिल सकती है।

DRDO की बड़ी कामयाबी
2-डीजी को DRDO की मदद से इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ने तैयार किया है। 2DG कोरोना के मॉडरेट से लेकर गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के लिए काफी कारगर साबित हुई है और सबसे बड़ी बात यह है कि कोरोना के गंभीर मरीजों की ऑक्सिजन पर निर्भरता कम करेगा। पिछले कुछ समय में ऑक्सिजन संकट के कारण बहुत से कोरोना मरीजों की जान गई है। 2DG दवा शुरुआत में बड़े शहरों के कुछ अस्पतालों तक पहुंचेगी लेकिन बाद में यह सारे अस्पतालों को मिल सकेगी।

2DG में क्या है खास?
डीआरडीओ की कोरोनावायरस दवा 2 DG पाउडर के रूप में आती है और इसे पानी में घोलकर पीना होता है। यह दवा कोरोना से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन कर कोरोनावायरस को फैलने से रोकती है। 2dg दवा की खास बात यह है कि यह कोरोनावायरस से संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है। डीआरडीओ का दावा है कि कोरोना की इस दवा से मरीजों की ऑक्सिजन पर निर्भरता कम हो सकती है और उन्हें ज्यादा दिन तक अस्पताल में रुकने की जरूरत भी नहीं होगी।


खबर इनपुट एजेंसी से

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