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भूकंप से तबाह म्यांमार में फिर लगे झटके, 1000 से अधिक लोगों की मौत

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
29/03/25
in अंतरराष्ट्रीय, समाचार
भूकंप से तबाह म्यांमार में फिर लगे झटके, 1000 से अधिक लोगों की मौत
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नई दिल्ली: म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद से रह-रहकर झटके महसूस हो रहे हैं. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, शुक्रवार रात 11:56 बजे (स्थानीय समयानुसार) म्यांमार में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का एक और भूकंप आया. एनसीएस के अनुसार, नवीनतम भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था, जिससे इसके बाद झटके आने की आशंका बनी हुई है. वहां भूकंप से भारी तबाही हुई है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अब तक 1002 लोगों की मौत हो चुकी है और 1670 जख्मी हैं.

वहीं अफगानिस्तान में भी शनिवार सुबह 5:16 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. जमीन से 180 किमी की गहराई में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.7 मापी गई. अभी तक किसी तरह के नुकसान या जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. यह भूकंप म्यांमार और थाईलैंड में आए शक्तिशाली भूकंप के एक दिन बाद आया है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और इमारतें, बौद्ध स्तूप, सड़कें और पुल बुरी तरह नष्ट हो गए.

म्यांमार और पड़ोसी थाईलैंड में आए क्रमश: 7.7 और 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में इमारतें, पुल और बौद्ध मोनेस्ट्री नष्ट हो गए. म्यांमार में कम से कम 144 लोग मारे गए, जहां दो सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों से आई तस्वीरों और वीडियो में भारी नुकसान दिखाई पड़ रहा है. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जहां एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत भूकंप के झटकों से ढह गई.

भूकंप के कारण हुई मौतों, घायलों और नुकसान का अभी पूरी तरह आकलन नहीं हो पाया है – खास तौर पर म्यांमार में, जो दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है. यह देश गृहयुद्ध में उलझा हुआ है, और यहां सैन्य शासन होने के कारण सूचना पर कड़ा नियंत्रण है. म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने टेलीविजन पर घोषणा करते हुए कहा, ‘मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका हैत्र’ उन्होंने बताया कि उनके देश में कम से कम 144 लोग मारे गए हैं और 730 अन्य घायल हुए हैं.

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में अधिकारियों ने बताया कि एक ऊंची इमारत सहित तीन निर्माण स्थलों के ढहने से 10 लोग मारे गए, 16 घायल हुए और 101 लोग लापता हैं. शुक्रवार को दोपहर के समय 7.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के पास था. इस भूकंप के बाद और झटके भी लगे, जिनमें से एक की तीव्रता रिक्टर स्केल 6.4 मापी गई. मांडले में, भूकंप के कारण कथित तौर पर कई इमारतें ढह गईं, जिनमें शहर के सबसे बड़े मठों में से एक भी शामिल है.

म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ की तस्वीरों में बचाव दल को सिविल सेवकों के आवास वाली कई इमारतों के मलबे से पीड़ितों को बाहर निकालते हुए दिखाया गया है. म्यांमार की सरकार ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में ब्लड की बहुत ज्यादा जरूरत है. ऐसे देश में जहां पिछली सरकारें कभी-कभी विदेशी सहायता स्वीकार करने में धीमी रही हैं, मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि म्यांमार सहायता स्वीकार करने के लिए तैयार है.

भारत ने विनाशकारी भूंकप का दंश झेल रहे म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री भेजी है. भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान हिंडन एयरफोर्स स्टेशन से राहत सामग्री लेकर म्यांमार रवाना हुए, जिसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, सैनिटेशन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट, आवश्यक दवाएं (पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, कैनुला, सीरिंज, दस्ताने, सूती पट्टियाँ, मूत्र बैग, आदि) शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 5 मिलियन डॉलर दिए हैं.

भूकंप के कारण टूटी-फूटी सड़कों, ढह चुके पुलों और टूटे बांध की खबरों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि बचाव दल पहले से ही मानवीय संकट से जूझ रहे देश के सुदूर इलाकों तक कैसे पहुंचेंगे. इंटरनेशनल रेक्यू कमिटी के म्यांमार डायरेक्टर मोहम्मद रियास ने कहा, ‘हमें डर है कि इस भूकंप से हुए विनाश का आकलन करने में हमें कई सप्ताह लग सकते हैं.’ यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने अनुमान लगाया है कि मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है.

म्यांमार की सेना ने फरवरी 2021 में आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार से सत्ता छीन ली थी. म्यांमार में सेना और लंबे समय से स्थापित मिलिशिया और नवगठित लोकतंत्र समर्थक मिलिशिया के बीच खूनी गृहयुद्ध चल रहा है. सेना ने म्यांमार के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण खो दिया है, और कई जगहें बेहद खतरनाक हैं या सहायता समूहों के लिए पहुंचना असंभव है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गृह युद्ध के कारण 3 मिलियन से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं और लगभग 20 मिलियन लोग जरूरतमंद हैं.

थाईलैंड की तुलना में म्यांमार में भूकंप आना अपेक्षाकृत अधिक आम बात है. समाचार एजेंसी एएफपी ने यूएसजीएस का हवाला देते हुए बताया कि 1930 से 1956 के बीच, सागाइंग फॉल्ट के पास 7.0 तीव्रता के छह शक्तिशाली भूकंप आए, जो देश के मध्य से होकर गुजरता है. थाईलैंड भूकंपीय क्षेत्र में नहीं आता है और वहां महसूस किए जाने वाले लगभग सभी भूकंप, जो दुर्लभ हैं, पड़ोसी म्यांमार में आते हैं. चूंकि बैंकॉक में इमारतों को शक्तिशाली भूकंप के झटकों को झेलने लिए डिजाइन नहीं किया गया है, इसलिए यहां इमारतों को महत्वपूर्ण नुकसान हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र म्यांमार के लिए राहत सामग्री जुटा रहा है. उन्होंने कहा कि म्यांमार सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता मांगी है. गुटेरेस ने कहा कि देश में संयुक्त राष्ट्र की टीम प्रभावित लोगों की सहायता के लिए क्षेत्र में संसाधन जुटाने के लिए संपर्क में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को म्यांमार की मदद करने का संकल्प लिया.

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया कि म्यांमार में शुक्रवार से लेकर अब तक छह भूकंप आ चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की प्रवक्ता मार्गरेट हैरिस ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, ‘हमने अपने लॉजिस्टिक्स हब को सक्रिय कर दिया है ताकि विशेष रूप से आघात संबंधी आपूर्ति और बाहरी फिक्सेटर जैसी चीजों की तलाश की जा सके, क्योंकि हमें लगता है कि बहुत सारे घायल लोग होंगे, जिनका इलाज करना होगा.’

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