देहरादून : उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. वन की जमीन कब्जाने के आरोप में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा, “प्रदेश में इस तरह के जब जब मामले आते हैं, तब तक विधिक राय लेते हुए विधिक कार्यवाही की जाती है. इस मामले में भी सरकार पूरी कार्रवाई करेगी. जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी.”
रिजर्व फॉरेस्ट में काटे थे साल के 25 पेड़
उत्तराखंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक बीएस सिद्धू पर सरकारी जमीन कब्जाने और पेड़ काटने का आरोप है. जानकारी के अनुसार, सिद्धू ने वर्ष 2012 में मसूरी वन प्रभाग में वीरगिरवाली गांव में 1.5 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी. इस जमीन से मार्च 2013 में साल के 25 पेड़ काट लिए गए.
7 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
इस मामले को लेकर बीएस सिद्धू के खिलाफ राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है. सूचना मिलने पर वन विभाग ने इसकी जांच कराई. पता चला कि संबंधित पेड़ जिस जमीन पर थे, वह रिजर्व फॉरेस्ट है. 10 अक्टूबर 2022 को शासन से अनुमति मिलने के बाद थाना राजपुर में यह मुकदमा पूर्व डीजीपी सिद्धू सहित 7 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया.
इन धाराओं में दर्ज किया गया है केस
यह मुकदमा मसूरी रेंज के प्रभागीय अधिकारी आशुतोष सिंह की लिखित तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया था. इसमें पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू के अलावा महेंद्र सिंह, नत्थूराम, दीपक शर्मा, स्मिता दीक्षित, सुभाष शर्मा और कृष्ण सिंह के खिलाफ धारा 420, 419, 467, 468, 471, 120b, 166 और 168 आईपीसी और 7 भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है. शासन की अनुमति के बाद इस मुकदमे की जांच सीओ मसूरी जूही मनराल को सौंपी गई है.
एनजीटी ने कहा था- 46 लाख भरना होगा मुआवजा
2018 में भी एनजीटी ने बीएस सिद्धू पर इसी मामले को लेकर 46 लाख का मुआवजा भरने को कहा था. इस मामले में कई तथ्य को दबाने के लिए बीएस सिद्भु द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर शिकायतकर्ताओं पर उत्पीड़न करने का भी आरोप था. सवाल है जब मामला इतना बड़ा है और एनजीटी के फैसले के बाद भी सरकार को करवाई करने में इतना समय क्यों लगा.
