तो मायूसी को
खुद पर हावी होने ना दो
“””बीज””” उदासी के,
खुद के मन को बोने ना दो !!!!
उचित अनुचित भेद सके नैना
नयनों को बेबस होने ना दो
हो पीर चाहे कितनी गहरी
अश्क नयनों से बहने ना दो !!!!
राह चाहे कितनी भी डगमग हो
कदमों को लड़खडाने ना दो
चले हो गर पाने मंजिल तो,
“”सपनों”” को यूं ढहने ना दो !!!!
~आरती गौड़~
(लेखिका)