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गुदड़ी के लाल, करेंगे एक दिन…कमाल

लखनऊ की सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस" महिलाओं खासकर गृहणियों की बनाई और चलाई है। कभी किटी पार्टी में व्यस्त रहने वाली महिलाएं पिछले 3 साल से जानकीपुरम और उसके आसपास के गरीबों के बच्चों को पढ़ा-बढ़ा रही हैं। अब इन महिलाओं के मनोरंजन का पैसा और समय दोनों बच्चों का भविष्य गढ़ने में खर्च हो रहा है। गरीबों के 8 बच्चों से यह सिलसिला कभी पार्क के खुले मैदान में और कभी बांके बिहारी कुंज के बेसमेंट में फटी चटाइयों, गांव में कुछ मिली स्टेशनरी से शुरू हुआ था।

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
13/10/21
in मुख्य खबर, राष्ट्रीय
गुदड़ी के लाल, करेंगे एक दिन…कमाल
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गौरव अवस्थी “आशीष”


लखनऊ की सामाजिक संस्था “रूबरू एक्सप्रेस” महिलाओं खासकर गृहणियों की बनाई और चलाई है। कभी किटी पार्टी में व्यस्त रहने वाली महिलाएं पिछले 3 साल से जानकीपुरम और उसके आसपास के गरीबों के बच्चों को पढ़ा-बढ़ा रही हैं। अब इन महिलाओं के मनोरंजन का पैसा और समय दोनों बच्चों का भविष्य गढ़ने में खर्च हो रहा है। गरीबों के 8 बच्चों से यह सिलसिला कभी पार्क के खुले मैदान में और कभी बांके बिहारी कुंज के बेसमेंट में फटी चटाइयों, गांव में कुछ मिली स्टेशनरी से शुरू हुआ था। आज इस केंद्र में गुदड़ी के 60 लाल शिक्षा और संस्कार दोनों साथ-साथ ग्रहण करते हुए बड़े हो रहे हैं। घर के कामकाज करते हुए यह महिलाएं बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को निखारकर उनके भविष्य का सुखद और सफल मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस"

इन महिलाओं की मुखिया हैं, पंजाब नेशनल बैंक ब्रांच मैनेजर के तौर पर कार्यरत मुकेश वार्ष्णेय की बहुमुखी प्रतिभा के धनी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना वार्ष्णेय। उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है-अलका गुप्ता (सचिव) , सविता वार्ष्णेय, मधुलिका गुप्ता, शालिनी कपूर, सुधा वार्ष्णेय, प्रीति तिवारी, नम्रता, ममता गुप्ता, किरण गुप्ता, सरिता, ज्योति खरे एवं कृति वार्ष्णेय। मुकेश वार्ष्णेय, राजीव वार्ष्णेय, संजीव गुप्ता, राजीव श्रीवास्तव, यूएस अवस्थी, अमरनाथ मिश्रा, विकास मेहरोत्रा, आकाश घर की दहलीज लांग कर बच्चों का भविष्य बनाने निकली महिलाओं का कदम से कदम मिलाकर साथ देकर काबिले तारीफ काम कर रहे हैं।

सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस"

कभी लखनऊ जाएं तो महिलाओं के प्रयास को अपनी आंखों से देखें जरूर। संस्था के तीसरे स्थापना दिवस पर इन मात्र शक्तियों और गुदड़ी के लालों से हमें भी मिलने का मौका मिला। झोपड़ी कच्चे घरों दूसरे के प्लाट में छप्पर डालकर रह रहे परिवारों के इन बच्चों- पूजा, प्राची, नीलू, मनीषा, मुस्कान, शिवांश, उर्मिला, यश में गजब की प्रतिभा के दर्शन हमने भी किए। छोटे-छोटे बच्चे नन्हे हाथों से पोस्टर बना कर लाए। बच्चों की कढ़ाई के एक से बढ़कर एक नमूने देखने को मिले। शिक्षा संस्कार बीज रोपना तो महिलाओं का प्रमुख ध्येय है ही। भोजन के पहले मंत्र उच्चारण। स्कूल छोड़ने के पहले प्रार्थना। सुमधुर स्वर में गीतों की प्रस्तुतियां हम सबका मन मोहने वाली रहीं। मात्र 3 दिन की तैयारियों में लघु नाटिका प्रभावी और आकर्षक प्रस्तुति आसान नहीं थी लेकिन इस केंद्र पर बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से शानदार-जानदार प्रतिभा का परिचय प्रस्तुत किया। एक स्कूल संचालक होने के नाते भी हम जानते हैं कि छोटे बच्चों की स्टेज पर प्रस्तुति के समय शिक्षिकाएं नीचे से डायरेक्शन देती रहती है लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं था। बच्चों के प्रभाव का ही परिणाम था कि लघु नाटिका के एक दृश्य के बीच हम भी पात्र के रूप में प्रस्तुत हो गए।

सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस"

ऐसे रूबरू शिक्षा संस्कार केंद्र के दो बच्चों-अभिषेक वाल्मीकि और आर्यन साहू ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति राष्ट्रीय स्मारक समिति की भारत और अमेरिका इकाई द्वारा संयुक्त रुप से हिंदी दिवस के उपलक्ष में 11 सितंबर 2021 को पहली बार ऑनलाइन आयोजित की गई। अंतर्राष्ट्रीय काव्य पाठ प्रतियोगिता में द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किए थे। पूरे आत्मविश्वास के साथ इन दोनों बच्चों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर सबको चौंका दिया था। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रतिभा के बल पर ही इन बच्चों ने यह स्थान प्राप्त किया होगा। किसी कृपा की बदौलत नहीं। इनके द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने के निर्णायक और कोई नहीं 120 साल पुरानी पत्रिका “सरस्वती” के वर्तमान प्रधान संपादक प्रोफ़ेसर देवेंद्र शुक्ल थे।

सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस"

बच्चों की पारिवारिक परिस्थिति ऐसी नहीं है कि वह स्कूली शिक्षा ग्रहण कर पाएं। अभिषेक वाल्मीकि के पिता मुकेश वाल्मीकि मूल रूप से बाराबंकी के रहने वाले हैं और जानकीपुरम में ही स्थित एक नर्सिंग होम में सफाई कर्मी के तौर पर कार्यरत हैं। नर्सिंग होम के मालिक द्वारा ही दी गई जगह पर कच्चा घर बनाकर परिवार के साथ रहने वाले मुकेश वाल्मीकि का यह सुयोग्य पुत्र अभिषेक केवल कविता करना ही नहीं जानते। उसके अंदर अन्य तमाम प्रतिभाएं छिपी हुई हैं। रूबरू के प्रयासों से यह प्रतिभाएं अंकुरित होकर सामने भी आने लगी है। रूबरू शिक्षा संस्कार केंद्र की प्रेरणा से ही इस वर्ष सरकारी विद्यालय में कक्षा 5 में वह पढ़ाई कर रहा है। तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले आर्यन साहू के पिता चेतराम राजमिस्त्री है और मां सोनी गृहणी। मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले चेतराम जानकीपुरम में ही किसी के खाली पड़े प्लाट में कच्चा घर बना कर गुजर-बसर करते हैं। रूबरू के प्रयासों का ही फल है कि आर्यन भी कक्षा चार में एडमिशन ले पाया है।

सामाजिक संस्था "रूबरू एक्सप्रेस"

आर्यन की स्वरचित कविता पढ़िए-

“देश से प्यार”
अब कोई ना आगे आए
ना हम से टकराए
हमें देश से इतना प्यार
अपना झंडा हम फहराएं
दुश्मन को हम मजा चखाएं
अपनी धरती पर मिट जाएं
और देश की शान बढ़ाएं

“अभिषेक की स्वरचित कविताओं की चंद लाइने हैं-

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से
हमें आजादी मिली बीवी शहीदों के बलिदान से
आजादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी
लोगों ने प्राण की कीमत बड़ी चुकाई थी
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया
हम को आपस में लड़ाने की नीति अपनाई थी
हमने अपना गौरव पाया अपने स्वाभिमान से
हमें मिली आजादी वीर शहीदों के बलिदान से..”

गुदड़ी के इन लालों द्वारा लिखी गई यह कविताएं शब्द शिल्प में आपको भले कमजोर लगे लेकिन भाव इसमें भरपूर है। इन कविताओं के वाचन की प्रस्तुति दी आपको आश्चर्य में डालने वाली लगेगी। अंतस से निकली कविताएं यह साबित करने के लिए काफी है कि यह बच्चे भविष्य में हमारी-आपकी-सबकी शान बनेंगे। हम सबको गर्व का मौका प्रदान करेंगे। बशर्ते हम इनके संघर्ष में साथ दें और साक्षी बनें।

इन बच्चों को गढ़ने में अपना पैसा पसीना और समय लगा रहीं रूबरू एक्सप्रेस सामाजिक सेवा संस्था की सभी मातृ शक्तियों को प्रणाम है..प्रणाम है..प्रणाम है..

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