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15 हजार की सैलरी पर आयकर विभाग का 33 करोड़ का नोटिस, जानिए ऐसा हो तो क्या करें

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
02/04/25
in व्यापार, समाचार
15 हजार की सैलरी पर आयकर विभाग का 33 करोड़ का नोटिस, जानिए ऐसा हो तो क्या करें
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नई दिल्ली: पंद्रह हजार रुपये वेतन पाने वाले एक व्यक्ति को 33.88 करोड़ रुपये का आयकर नोटिस मिला, 8,500 रुपये वेतन पाने वाले दूसरे व्यक्ति को 3.87 करोड़ रुपये का नोटिस और तीसरे व्यक्ति को 7.79 करोड़ रुपये का नोटिस मिला है. मार्च में तीन नोटिस उन लोगों को भेजे गए हैं जो मुश्किल से अपना गुजारा कर रहे हैं, यह पहचान प्रणाली के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है. यदि केवल उनके वेतन को ही ध्यान में लिया जाए तो ये व्यक्ति आयकर का भुगतान करने के भी पात्र नहीं.

इन पीड़ितों और जिन लोगों से उन्होंने मदद मांगी थी, द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ व्यापारिक इकाइयों ने इन व्यक्तियों की सरकार द्वारा जारी पहचान संख्या जैसे आधार और पैन कार्ड का उपयोग करके लेनदेन किया.

15 हजार की सैलरी पर मिला 33 करोड़ का नोटिस

करण कुमार (34) को 33.88 करोड़ रुपये का आयकर नोटिस मिला था. कुमार को वकीलों ने बताया कि महावीर एंटरप्राइजेज नामक एक कंपनी करण के नाम पर जाली पैन और आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में पेट्रोलियम उत्पादों और स्टील के सामान में बड़े पैमाने पर लेनदेन कर रही है.

भारतीय स्टेट बैंक, खैर शाखा में संविदा कर्मचारी के रूप में 15 हजार रुपये के वेतन पर काम करने वाले करण कुमार ने संवाददाताओं को बताया, “मुझे 29 मार्च को शाम करीब चार बजे आयकर नोटिस मिला. मैंने आयकर अधिकारियों से मुलाकात की जिन्होंने मुझे इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज कराने की सलाह दी.”

पुलिस ने दर्ज की शिकायत

उन्होंने इस संबंध में चंडौस थाने में एक शिकायत दी. थाना प्रभारी (SHO), चंदौस हरिभान सिंह ने पुष्टि की कि कुमार की शिकायत पर एक मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच की जा रही है.

इससे पहले 28 मार्च को गभाना थाने के अंतर्गत संगोर गांव निवासी मोहित कुमार उस समय हैरान रह गए, जब स्थानीय डाकिया ने उन्हें अंग्रेजी में लिखा एक आयकर नोटिस दिया. एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में मामूली कर्मचारी मोहित ने अपने नियोक्ता से मदद मांगी, जिसने एक जीएसटी वकील से सलाह ली. वकील ने उन्हें बताया कि एमके ट्रेडर्स नाम की एक फर्म मोहित के आधार कार्ड का इस्तेमाल करके कारोबार कर रही है.

8,500 की सैलरी पर 3.87 करोड़ का नोटिस

आयकर विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड के मुताबिक, एमके ट्रेडर्स 2020 से बड़े पैमाने पर कारोबारी लेन-देन कर रहा था. डिजिटल रूप से प्राप्त इस जानकारी के आधार पर विभाग ने मोहित को 3.87 करोड़ रुपये का नोटिस थमा दिया, जिससे असहाय कर्मचारी परेशान हो गया.

मोहित ने कहा, “मैं 8,500 रुपये की मासिक आय पर गुजारा करता हूं और अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी भरण-पोषण करता हूं. इस नोटिस ने मुझे परेशान कर दिया है. मैं बहुत तनाव में हूं.”

उन्होंने कहा कि उन्होंने नोटिस जारी करने वाले आयकर अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. मोहित ने याद किया कि 2020 में उन्होंने दिल्ली में एक नौकरी के लिए आवेदन किया था और अपने सभी पहचान दस्तावेज जमा किए थे. ऐसे ही एक अन्य मामले में 22 मार्च को एक छोटे जूस विक्रेता रईस अहमद को 7.79 करोड़ रुपये का ऐसा ही आयकर नोटिस मिला, जिससे वह हैरान रह गए.

स्थानीय आयकर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि नोटिस दिल्ली से भेजे गए थे और ‘‘यहां कुछ नहीं किया जा सकता.’’ अलीगढ़ के एक वरिष्ठ आयकर वकील ने कहा कि “डिजिटल धोखाधड़ी” के ऐसे मामले डिजिटल पहचान प्रणाली के बड़े पैमाने पर व्यवस्थित दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं.

गलत नोटिस मिले तो क्या करें आप?

अगर आपको भी आयकर विभाग (Income Tax Department) से अधिक टैक्स बकाया होने का नोटिस मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे ध्यान से पढ़ें और समझें कि आपको किस वजह से यह नोटिस भेजा गया है. नोटिस में लिखा होगा कि आपको कितना अतिरिक्त टैक्स देना है और वह किस आकलन वर्ष (Assessment Year) से जुड़ा है. साथ ही, इसमें यह भी बताया जाएगा कि यह नोटिस किस सेक्शन के तहत जारी किया गया है, जैसे धारा 143(1), 147, 156 आदि. इसे अपने फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को फिर से देखें. फॉर्म 26AS और AIS (Annual Information Statement) से चेक करें कि आपकी आय और टीडीएस (TDS) का सही मिलान हो रहा है या नहीं. कई बार बैंक से ब्याज आय या अन्य आय सही से रिपोर्ट नहीं होती, जिससे गड़बड़ी हो सकती है.

अगर आपको लगता है कि नोटिस में दी गई जानकारी सही नहीं है, तो आप ऑनलाइन ITR रिवाइज (Revised Return) कर सकते हैं या उत्तर (Response) दर्ज कर सकते हैं. अगर मामला जटिल है या आपको नोटिस समझने में परेशानी हो रही है, तो किसी CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें. अगर आप आयकर विभाग के फैसले से सहमत नहीं हैं, तो CIT (Appeals) में अपील कर सकते हैं.

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