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चीन को पछाड़ भारत बन सकता है नंबर वन!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
04/04/25
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, समाचार
चीन को पछाड़ भारत बन सकता है नंबर वन!
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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत समेत दुनिया के कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी तो चीन पर 34 फीसदी टैक्स लगाया है। इस नए टैक्स के साथ चीन पर कुल 54 फीसदी टैरिफ लग जाएगा।

यह टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ है। 10% का बेसलाइन टैक्स 5 अप्रैल 2025 से लागू होगा। भारत पर लगने वाला अतिरिक्त टैक्स 27% होगा। यह 9 अप्रैल 2025 से लागू होगा। अमेरिका के इस टैरिफ से भारत को होने वाले कुछ नुकसान हैं तो वहीं इसके कई फायदे भी सामने आ रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक टैरिफ लगने के बावजूद भारत चार सेक्टर में चीन को पछाड़ नंबर एक बन सकता है।

कैसे होगा भारत को फायदा?

ट्रंप के टैरिफ में बदलाव से एशिया पर असर पड़ेगा। इसका फायदा भारत को हो सकता है। ट्रंप सरकार ने कुछ एशियाई देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ यानी टैक्स बढ़ा दिया है। इस वजह से उन देशों से सामान खरीदना महंगा हो जाएगा। अब भारत के पास मौका है कि वह उन देशों की जगह ले। भारत उन सामानों को बनाकर दूसरे देशों को बेच सकता है। इससे भारत का व्यापार बढ़ेगा।

भारत पर 27 फीसदी टैरिफ लगाने के बावजूद यह चीन के (कुल 54 फीसदी) टैरिफ के मुकाबले आधा है। मान लीजिए कि पहले चीन से एक खिलौना 100 रुपये में मिलता था। अब ट्रंप के टैरिफ की वजह से वो 120 रुपये का हो गया। ऐसे में, अगर भारत वही खिलौना 110 रुपये में बेचता है तो लोग भारत से खरीदेंगे। इस बदलाव से भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है।

कपड़ा और गारमेंट

भारत का कपड़ा उद्योग सबसे ज्यादा फायदे में रहने वाला है। चीन (54%) और बांग्लादेश (37%) से आने वाले कपड़ों पर अमेरिका के ज्यादा टैरिफ लगने से भारतीय प्रोडक्ट सस्ते हो जाएंगे।

भारत में पहले से ही कपड़ा बनाने का बड़ा और अलग-अलग तरह का उद्योग है। इस वजह से अमेरिकी रिटेलर्स ज्यादा टैरिफ वाले देशों से दूर जाकर भारत से सामान खरीद सकते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल ब्रांड भी बांग्लादेश और चीन से अपना उत्पादन भारत में शिफ्ट कर सकते हैं, ताकि टैरिफ से बचा जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन

GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत को फायदा हो सकता है। वियतनाम और थाईलैंड पर अब इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सामानों पर ज्यादा टैरिफ लगने से भारत के पास एक अच्छा विकल्प बनने का मौका है।

भारत की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं, खासकर स्मार्टफोन और कंपोनेंट के लिए, पहले से ही एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को निवेश करने के लिए आकर्षित कर रही हैं। इस वजह से टैरिफ होने के बावजूद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में और मजबूत हो सकता है। खासकर असेंबली और कंपोनेंट बनाने में।

सेमीकंडक्टर

भारत में ताइवान या दक्षिण कोरिया जैसी आधुनिक सेमीकंडक्टर बनाने की क्षमता नहीं है, लेकिन ताइवान के सामान पर 32% का टैरिफ लगने से कंपनियां सप्लाई चेन के कुछ हिस्सों को अलग-अलग देशों में शिफ्ट कर सकती हैं।

भारत में पैकेजिंग, टेस्टिंग और पुराने चिप बनाने जैसे निचले स्तर के काम करने की क्षमता है। अगर बुनियादी ढांचे का विकास होता रहे और सरकार मदद करती रहे तो भारत भी ग्लोबल चिप इकोसिस्टम में शामिल हो सकता है।

मशीनरी, खिलौने और ऑटो कंपोनेंट

अमेरिका के टैरिफ से चीन और थाईलैंड से आने वाली मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और खिलौनों पर भी असर पड़ेगा। अगर भारत सही तरीके से काम करे तो वह इन क्षेत्रों में एक विकल्प बन सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करे, प्रोडक्शन बढ़ाए और क्वालिटी बनाए रखे।

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