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भारत ने बिछा दी पाकिस्‍तान की तबाही की बिसात!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
30/05/25
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, समाचार
भारत ने बिछा दी पाकिस्‍तान की तबाही की बिसात!
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नई दिल्‍ली. पहलगाम में टेरर अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर पाकिस्‍तानी सेना और आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाया है, जिसे वे दशकों तक याद रखेंगे. इसके बाद भारत ने अब पाकिस्‍तान के खिलाफ इंटरनेशनल लेवल पर डिप्‍लोमेटिक कैंपेन छेड़ दिया है. भारतीय सांसदों का प्रतिनिधिमंडल इन दिनों पूरी दुनिया के दौरे पर है, ताकि पाकिस्‍तान के वहशी चेहरे को पूरी तरह से बेनकाब कर उसकी असलियत के बारे में सबको बताया जा सके. पहलगाम टेरर अटैक के तुरंत बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को अनिश्‍च‍ित काल तक के लिए निलंबित कर इस्‍लामाबाद को पहली बड़ी चोट दी थी.

इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादियों के कैंप को तबाह करने के साथ ही पाकिस्‍तानी फौज के एयरबेस को टारगेट कर सीधा और स्‍पष्‍ट संदेश दे दिया था. अब भारत ने कूटनीतिक स्‍तर पर एक और गहरी चाल चली है, जिससे पाकिस्‍तान आर्थिक तौर पर तबाही के कगार पर पहुंच सकता है. भारत ने ईरान और अफगानिस्‍तान के साथ मिलकर नया ट्रेड फ्रंट बनाने की प्‍लानिंग पर काम करना शुरू कर दिया है. दिलचस्‍प बात यह है कि इसमें नई दिल्‍ली को अफगानिस्‍तान की तालिबान सरकार का भी पूरा सााि मिल रहा है.

अगस्‍त 2021 की बात है जब तकरीबन दो दशक की लंबी अवधि के बाद विदेशी फौज ने अफगानिस्‍तान को उसकी हालत पर छोड़ कर वहां से रवाना हो गई थी. इसके बाद तालिबान ने काबुल पर कब्‍जा कर लिया और अफगानिस्‍तान में एक बार फिर से उसका राज हो गया. काबुल में तालिबान की वापसी पर पाकिस्‍तान के नेताओं और फौज ने ईद की तरह का जश्‍न मनाया था. अफगानिस्‍तान की तालिबान सरकार को बधाई देने वालों में पाकिस्‍तान चुनिंदा पहले देशों में से एक था.

पड़ोसी देश को यकीन था कि अब तालिबान का इस्‍तेमाल भारत के खिलाफ किया जा सकेगा, क्‍योंकि 9/11 घटना के बाद भारत पश्चिमी ताकतों के समर्थन में रहा था. हामिद करजई से लेकर अशरफ गनी तक की सरकार को भारत ने अपना सपोर्ट दिया था. साल 2001 में तालिबान सरकार के पतन के बाद भारत ने अफगानिस्‍तान में डेवलपमेंट का काम भी किया था. इन सबको देखते हुए पाकिस्‍तान को भारत के खिलाफ तालिबान के फुल सपोर्ट की उम्‍मीद थी. हालांकि, पाकिस्‍तान की उम्‍मीदों के उलट घटनाक्रम हुए. यहां तक कि पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान सीमा में घुसकर एयर स्‍ट्राइक करने का दावा भी किया. इससे दोनों देशों के रिश्‍ते कफी तल्‍ख हो गए. तालिबान सरकार की पाकिस्‍तान से दूरियां बढ़ गईं. अब तालिबान भारत के समर्थन से नई प्‍लानिंग कर रहा है.

भारत का मास्‍टरप्‍लान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने अफगानिस्‍तानी समकक्ष से बात की थी. उसे बाद NSA अजित डोभाल ने अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. अली अकबर अहमदियान से द्विपक्षीय बातचीत कर पाकिस्‍तान को घेरने का पूरा खाका तैयार कर दिया. अब उसका परिणाम भी देखने को मिल रहा है. दरअसल, तालिबान सरकार अपना राजस्‍व बढ़ाने और दुनिया के अन्‍य देशों के साथ ट्रेड पार्टनरशिप को नई ऊंचाई देने के लिए बेकरार है. इसे देखते हुए अफगानिस्‍तान अब पाकिस्‍तानी बंदरगाहों पर अपनी निर्भता को कम करने का विकल्‍प ढूंढ़ रहा है.

भारत और पाकिस्‍तान के बीच जारी तनाव ने उसे यह मौका दे भी दिया है. तालिबान की नजर ईरान की चाबहार पोर्ट पर टिकी है. तालिबान सरकार चाबहार बंदरगाह तक अपनी पहुंच चाहती है, ताकि ट्रेड को नया आकार दिया जा सके. दिलचस्‍प बात यह है कि इस पोर्ट को भारत ऑपरेट करता है. ऐसे में तालिबान चाहता है कि भारत इसमें उसकी मदद करे. नई दिल्‍ली की रणनीति अफगानिस्‍तान को पाकिस्‍तान से दूर करने की रही है, ऐसे में दोनों देशों के लिए यह सुनहरा मौका बन आया है.

अफगानिस्‍तान की चाहत, ईरान की जरूत

अजित डोभाल ने पिछले दिनों ईरान के टॉप ऑफिसियल से फोन पर बात की थी. ‘इकोनोमिक टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉर‍िडोर (INSTC) पर भी बता हुई. यहां यह बताना लाजमी है कि पाकिस्‍तान ने हाल में ही सालों से वहां रह रहे अफगान शरणार्थियों को अल्‍टीमेटम देते हुए उन्‍हें बाहर निकाल दिया था. इससे तालिबान सरकार और शाहबाज शरीफ गवर्नमेंट के बीच तल्‍खी और बढ़ गई है.

अब भारत-पाकिस्‍तान के बीच तनाव का फायदा उठाकर अफगानिस्‍तान अलग फ्रंट बनाना चाहता है. इसे देखते हुए चाबहार पोर्ट प्रोजेक्‍ट में शामिल होना चाहता है, ताकि उसे इंटरनेशनल मार्केट का एक्‍सेस मिल सके. वहीं, ईरान बदलते माहौल में इस रीजन में अपना रसूख और प्रभाव बढ़ाना चाहता है. ऐसे में अब भारत, ईरान और अफगानिस्‍तान के बीच नया ट्रेड फ्रंट बनने की संभावना काफी बढ़ गई है. इससे आर्थिक और सामरिक तौर पर पाकिस्‍तान को सबसे ज्‍यादा नुकसान होना तय है.

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