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गांगुली की कप्तानी में भारत ने सीखी ‘दादागिरी’, फिर बदल गई टीम की तस्वीर

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
08/07/23
in खेल संसार
गांगुली की कप्तानी में भारत ने सीखी ‘दादागिरी’, फिर बदल गई टीम की तस्वीर
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नई दिल्ली : भारतीय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली आज 51 जन्मदिन मना रहे हैं। उन्हें भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उस नायक के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने टीम इंडिया की तस्वीर बदलने में अहम योगदान दिया। साल 2000 में जब टीम इंडिया मैच फिक्सिंग के आरोप में फंसी थी तब कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल उन्होंने ही टीम इंडिया को वर्ल्ड क्रिकेट में नई पहचान दिलाई थी। उन्हीं की अगुवाई में टीम इंडिया ने ‘दादागिरी’ सीखी और वर्ल्ड क्रिकेट को बताया कि टीम इंडिया विदेशी सरजमीं पर भी जीतने का मद्दा रखती है। गांगुली की कप्तानी में ही युवा खिलाड़ियों को टीम में जल्द मौका देने का दौर शुरू हुआ था। दादा ने वीरेंद्र सहवाग, जहीर खान और युवराज सिंह जैसे कई नगीने भारत को दिए हैं। आइए आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर उनके कुछ रिकॉर्ड्स और क्रिकेट के सफर के बारे में जानते हैं-

पहले दो टेस्ट में जड़े शतक

अपने पूरे करियर के दौरान आक्रामक नेतृत्व शैली के लिए मशहूर सौरव गांगुली ने भारतीय टीम के लिए डेब्यू 1996 में किया था। लॉर्ड्स टेस्ट में शतक ठोक गांगुली ने करियर की शुरुआत में ही सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी थी, यहीं से उन्हें दादा का निकनेम भी मिल गया था। गांगुली यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपने दूसरे टेस्ट में भी सैंकड़ा जड़ उन तीन खिलाड़ियों की लिस्ट में जगह बनाई जिन्होंने करियर के शुरुआती दो टेस्ट में शतक जड़े थे।

वनडे में भी जोरदार एंट्री

प्रिंस ऑफ कोलकाता के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने वनडे क्रिकेट में भी जोरादर एंट्री ली, 1997 में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने लगातार चार प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड जीते। गांगुली वनडे क्रिकेट में एकमात्र ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने ये कारनामा किया है। गांगुली ने इसके बाद 1999 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की पारी खेली। यह आज तक किसी भारतीय द्वारा वर्ल्ड कप में खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारी है।

मुश्किल समय में संभाली कप्तानी

सौरव गांगुली ने टीम इंडिया की कप्तानी उस समय संभाली जब साल 2000 में भारतीय टीम मैच फिक्सिंग के आरोप झेल रही थी। इस दौरान उन्होंने नई प्रतिभाओं को तैयार करना शुरू किया। गांगुली ने भारत को पहली बार 2000 आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाया। टीम इंडिया का एक और मील का पत्थर 2001 में आया, जब गांगुली की अगुवाई वाली टीम ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया।

गांगुली का सबसे यादगार पल निश्चित रूप से वह था जब उन्होंने लॉर्ड्स की बालकनी पर अपनी शर्ट उतार दी थी, जब भारत ने 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में इंग्लैंड के मुंह से जीत छीनी थी। इसके बाद वर्ल्ड कप 2003 में टीम इंडिया फाइनल तक का सफर तय करने में कामयाब रही थी, मगर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

2004 में टीम इंडिया ने पाकिस्तान का दौरा किया था जहां वनडे और टेस्ट सीरीज खेली थी। इस दौरान टीम इंडिया ने पाकिस्तान की धरती पर पहली टेस्ट सीरीज भी जीती थी। 2005-06 में उस समय के कोच ग्रेग चैपल के साथ हुई अनबन के बाद गांगुली का डाउनफॉल शुरू हुआ। ऑफ साइड के भगवान कहे जाने वाले सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में 2008 में अपना आखिरी टेस्ट खेला था।

दादा ने भारत के लिए 113 टेस्ट और 311 वनडे मैच खेले जिसमें उन्होंने कुल 18,575 रन बनाए। उन्होंने कुल 195 मैचों में भारत की कप्तानी की जिसमें टीम इंडिया 97 मैच जीतने में सफल रही। इसके बाद वह बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (सीएबी) और बीसीसीआई के अध्यक्ष भी बने।

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