हर भारतीय के हाथ में पहुंचा भारत का फोन, चीन को ऐसे मिल रही चुनौती

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम कितना सफल रहा है. इसकी बानगी देखनी हो तो एक बार देश में बनने वाले मोबाइल फोन्स के आंकड़ों को देख लीजिए. बीते 10 साल में भारत ना सिर्फ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का हब बन गया है. बल्कि अब एक्सपोर्ट के मामले में चीन को चुनौती भी दे रहा है. नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने इससे जुड़े कई इंटरेस्टिंग फैक्ट्स शेयर किए हैं.

अमिताभ कांत को हाल में G20 Summit का शेरपा भी बनाया गया था. भारत सरकार के कई कार्यक्रम जैसे पर्यटन के लिए ‘इन्क्रिडिबल इंडिया’ और स्टार्टप इंडिया और मेक इन इंडिया को सफल बनाने में उनका काफी योगदान रहा है.

भारत में बिकने वाले 100% ‘मेड इन इंडिया’

अमिताभ कांत का कहना है कि 2023 में भारतीय बाजार में जितने भी फोन की सेल की गई है, वह पूरी तरह देश में ही तैयार हुए हैं. 2022 में ये आंकड़ा 98 प्रतिशत था. साल 2023 में भारत 27 करोड़ मोबाइल हैंडसेट का प्रोडक्शन करेगा. जबकि 2014 में भारत अपनी जरूरत के 81 प्रतिशत मोबाइल फोन चीन से आयात करता था.

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरर

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देश है. इसकी वजह से वह चीन को लगातार चुनौती दे रहा है. इतना ही नहीं साल 2014 से 2022 में भारत ने 2 अरब मोबाइल हैंडसेट का प्रोडक्शन किया है. भारत में बनने वाले करीब 20 प्रतिशत मोबाइल हैंडसेट का दूसरे देशों को निर्यात कर दिया जाता है. 2014 से 2022 के बीच भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 23% सालाना की ग्रोथ से बढ़ी है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि भारत में शियाओमी, ओप्पो, वीवो जैसे ब्रांड की असेंबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग पहले से हो रही है. हाल में एपल ने भी भारत में आईफोन बनाना शुरू किया है. इतना ही नहीं एपल आईफोन के अलावा अपने अन्य डिवाइस की मैन्युफैक्चरिंग भी भारत ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है. भारत सरकार ने पीएलआई स्कीम भी लॉन्च की हुई है, जो आने वाले दिनों में भारत को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में और बड़ा हब बनाएगा.

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