नीतीश-मोदी की मुलाकात में सबकुछ ठीक नहीं?

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के ताजा बयान से मीडिया में नये सिरे से हलचल तेज हो गई है। निशांत कुमार ने मीडिया में आकर ऐसा बयान दिया है जिससे बीजेपी समेत तमाम एनडीए के घटक दलों के सामने जवाब देने की चुनौती आ गई है। सीएम के बेटे का ऐसा बयान आने से हर कोई अचंभित है। आइए पहले जानते हैं निशांत कुमार ने कहा क्या है?

निशांत के किस बयान पर अटकलें तेज

मां की जयंती पर श्रद्धाजंलि अर्पित करने पहुंचे निशांत ने इस बात को लेकर खुशी जताई कि पीएम मोदी ने भागलपुर की रैली में उनके पिता और सीएम नीतीश कुमार लाडले कहकर संबोधित किया। निशांत ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘गठबंधन है तो बोलेंगे ही।’

इसके बाद निशांत ने कहा कि मीडिया के माध्यम से राज्य के तमाम युवाओं से आह्वान करते हैं कि पिताजी ने विकास किया है तो, उनके लिए वोट करें। पिछली बार लोगों ने उन्हें 43 सीटें दे दी, फिर भी उन्होंने विकास का क्रम रुकने नहीं दिया। इस बार सीट बढ़ना मांगता है, ताकि पिताजी आगे भी कार्य जारी रख सकें।

निशांत ने कहा, ‘मैं अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी आह्वान करता हूं कि वह पिताजी की नीतियों को और पिछले 19 साल में उनहोंने जो काम किया है उसे जनजन तक पहुंचाएं। जनता को सारी बातें मालूम होना चाहिए। तब वह समझ पाएगी कि कौन लायक है।’

सबसे महत्वपूर्ण बात निशांत ने यह कही- ‘एनडीए भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। जेडीयू के तमाम नेता और कार्यकर्ता सभी मिलकर सीएम फेस घोषित करें। ताकि उनके नेतृत्व में विकास कार्य जारी रहे।’

तेज प्रताप यादव की ओर से आरजेडी ज्वाइन करने के मिले ऑफर पर निशांत ने कहा- ‘कहते हैं, कहने दीजिए, जनता के दरबार में चलते हैं, वही तय कर देगी।’

निशांत को क्यों कहना पड़ा नीतीश को NDA चेहरा बनाने की डिमांड?

सवाल उठता है कि सीएम के बेटे निशांत कुमार को मीडिया के माध्यम से क्यों कहना पड़ा कि उनके पिता नीतीश कुमार को एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करना चाहिए। निशांत का ताजा बयान आने के बाद नये सिरे से अटकलें तेज हो गई है।

दरअसल, कुछ महीने पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक टीवी शो में बिहार में एनडीए के सीएम फेस के सवाल पर उन्होंने कहा था कि यह फैसला बीजेपी और जेडीयू के लोग मिलकर तय करेंगे। इसके कुछ घंटो बाद डेप्युटी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने बिहार में बीजेपी की सरकार बनाने की बात कही थी, हालांकि कुछ देर बाद ही उन्होंने इस बयान पर सफाई दे दी थी।

इन दोनों बयानों के आने के बाद से जेडीयू के कई नेताओं ने नाराजगी जाहिर की थी और पार्टी कार्यालय के बाहर स्लोगन लिखे पोस्टर लगाकर नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की अपनी बात रख दी थी।

आरजेडी की तरफ से आने लगे ऑफर
इसी बीच आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी एक यूट्यब चैनल से बातचीत में कहा नीतीश कुमार के दरवाजे खुले हुए हैं। अगर वह एनडीए से अलग होते हैं तो वह उन्हें स्वीकार करेंगे। हालांकि नीतीश की वापसी की खबरों पर तेजस्वी यादव ने विराम लगा दिया था।

पिछले दिनों दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश के नहीं पहुंचने पर भी पार्टी की ओर से चुप्पी साध ली गई। यहां गौर करने वाली बात यह है कि रेखा गुप्ता के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले ही नीतीश ने दिल्ली पहुंचकर पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इसी बीच आरजेडी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने मीडिया में कहा कि नीतीश कुमार उनके साथ आने वाले हैं, इसलिए रेखा वर्मा के शपथ ग्रहण में नहीं गए।

हमेशा से दूसरों अपनी इच्छा जाहिर करवाते रहे हैं नीतीश

यहां बता दें कि नीतीश कुमार जब कभी नाराज होते हैं तो वह चुप्पी साध लेते हैं। नीतीश के बदले पार्टी के दूसरे नेता बयान देने लगते हैं। बेटे निशांत कुमार के बयान को भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि बेटे निशांत को मीडिया में आकर क्यों कहना पड़ा कि एनडीए के तमाम दलों जिसमें जेडीयू भी शामिल है वह मीडिया के सामने क्लियर करे कि नीतीश कुमार ही चुनाव में चेहरा होंगे।

सारी बातें ठीक हैं, लेकिन 49 वर्षीय निशांत कुमार कम ही मौकों पर मीडिया से मुखातिब होते हैं। इस बार उनके दिए हुए बयानों में लड़कियों के ठहरने का इंतजाम और जेडीयू को हमारी पार्टी कहकर संबोधित करना कई तरह के नये सवालों को जन्म दे रहा है।

जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर और आरजेडी की सांसद मीसा भारती सरीखे नेता दावा कर रहे हैं कि नीतश कुमार अब एक बार फिर से सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठ पाएंगे।

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