जमीअत ने उठाई मकतबों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में संचालित मकतबों की मान्यता को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद की प्रदेश इकाई ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। गुरुवार को जमीयत के प्रदेश महासचिव शराफत अली कासमी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग डॉ. पराग मधुकर धकाते से मुलाकात कर उन्हे मांग पत्र सौंपकर उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन और शिक्षा विभाग से मान्यता लेने की अनिवार्यता को लेकर स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

जमीयत का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश, मुख्य सचिव के स्तर पर हुई बैठक में दिए गए मौखिक स्पष्टीकरण तथा जिला स्तर से जारी आदेशों में अंतर दिखाई दे रहा है। इससे मकतब संचालकों और संबंधित अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जमीयत प्रदेश महासचिव ने अपने पत्र में उत्तराखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन रिट याचिका संख्या 835/2025 का हवाला दिया है।

पत्र के मुताबिक, न्यायालय के आदेश के पैरा संख्या 11 में मकतब की प्रकृति और संचालन के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई है। जमीयत का कहना है कि आदेश में मकतब को सामान्य सरकारी औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से अलग रखते हुए उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर बात कही गई है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस विषय में जमीयत के प्रतिनिध्मिंडल ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव से मुलाकात की थी। जमीयत के अनुसार, बैठक में मुख्य सचिव की ओर से मौखिक रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि मकतब संबंधित कानून के दायरे में नहीं आते और उनके खिलाफ केवल इस आधार पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पत्र में कहा है कि इसके बावजूद सहायक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, हरिद्वार की ओर से आदेश संख्या 116 तथा पत्र संख्या 279,  31 अगस्त 2026 के माध्यम से मकतबों को उत्तराखंड शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।

जमीयत के मुताबिक, हाईकोर्ट के आदेश और मुख्य सचिव के स्तर पर दी गई मौखिक स्पष्टता के बाद जिला स्तर से जारी इस तरह के निर्देशों से संबंधित संस्थाओं के सामने प्रशासनिक और कानूनी असमंजस पैदा हो रहा है।

जमीयत ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से कई बिंदुओं पर स्थिति साफ करने का अनुरोध किया है। इस मौके पर भगवानपुर विधायक ममता राकेश, जमीअत की और से मुफ्रती तौफीक इलाही, मास्टर अब्दुल सत्तार व मौलाना हारून आदि मौजूद रहे।

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