धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों को अनिवार्य संबद्धता से मुक्त रखने की मांग

देहरादून। मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी देहरादून में गुरुवार को जमीअत के जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में मदरसों के सामने आ रही विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में फैसला लिया गया कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को पत्र भेजा जाएगा। पत्र के माध्यम से यह मांग की जाएगी कि केवल धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले मदरसों को प्राधिकरण से संबद्धता प्राप्त करने के लिए बाध्य न किया जाए।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद कई प्रावधानों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और मामला अभी विचाराधीन है। ऐसे में जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक धार्मिक शिक्षण संस्थानों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अनेक मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा देने के उद्देश्य से संचालित होते हैं और वे न तो सरकारी मान्यता चाहते हैं और न ही किसी प्रकार की सहायता। ऐसे संस्थानों के छात्र भी केवल धार्मिक ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक होते हैं, जिन्हें किसी सरकारी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होती।

जमीअत के प्रवक्ता मौहम्मद शाहनज़र ने कहा कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की और से 16 जनवरी 2026 को रिट याचिका संख्या 307/2026 में समान आदेश पारित किया गया है। जिस में कहा गया है कि केवल धार्मिक शिक्षा का ज्ञान देने के लिये स्थापित किये गये संस्थानों को किसी मान्यता की जरूरत नही है।

बैठक में संविधान के अनुच्छेद 25 और 30 का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार शिक्षा देने और अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थान स्थापित व संचालित करने का अधिकार है। बैठक के अंत में प्राधिकरण से अनुरोध किया गया कि जो संस्थाएं स्वेच्छा से मान्यता या सहायता नहीं लेना चाहतीं, उन्हें अधिनियम के तहत बाध्य न किया जाए।

इस अवसर पर मौलाना अब्दुल कुद्दूस, मौलाना शराकत कासमी, मौलाना हुसैन अहमद कासमी, मौलाना गुलशैर कासमी, मुफती अयाज़ अहमद, मास्टर अब्दुल सत्तार, कारी साजिद, मौलाना अकरम, मौलाना अब्दुल रहमान, मौलाना एज़ाज़ कासमी, मौलाना रागिब मजाहिरी, कारी मुन्तजिर, मुफती खुशनूद, मौलाना फिरोज, मौलाना उस्मान कासमी, कारी अहमद अली, मौलाना अरशद, मौलाना मुरसलीन अहमद, कारी शाहवेज काश्फी, कारी नासिर, मौलाना इनाम, मौलाना सदाकत मजाहिरी, मुफती हिफजान मजाहिरी, कारी मोहसिन, कारी फखरूज्जमा, मौलाना जीशान, कारी मुकीम, कारी सादिक, मौलाना मुस्तफा कासमी, मौलाना अब्दुल खालिक मजाहिरी, कारी फरीद, कारी असलम, कारी शहजाद, मौलाना जाहिद, कारी फरहान मलिक, मौलाना मरगूब, हाफिज अबुजर, कारी हुसैन, अशरफ हाशमी, कारी मसरूर व दानिश अली सहित बड़ी संख्या में उलेमा मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *