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Home देहरादून

टिहरी : खतरे की जद में कई मकान, आई दरारे

Frontier Desk by Frontier Desk
29/01/24
in देहरादून
टिहरी : खतरे की जद में कई मकान, आई दरारे
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  • विस्थापितों को आवंटित भूमि का मालिकाना हक नही दे पाई सरकारः भट्ट
  • जनता ने जिन्हें बड़ी उम्मीदों से अपना प्रतिनिधि निर्वाचित किया वे उसी जनता के साथ खेला कर गए

देहरादून। शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि जब-जब टिहरी झील में कोई महोत्सव होता है, तब-तब उन परिवारों पर क्या बीतती होगी जिनके मकान इसी झील के कारण खतरे की जद में है और खतरनाक दरारो से चौतरफा फट चुके है, या वे परिवार जिनकी भूमि 49.99 प्रतिशत तक डूब चुकी है, मगर उन्हें पूर्ण विस्थापन का लाभ नहीं मिला है। जो डूब क्षेत्र में उन्हे 74.40 लाख रुपए दिए जा रहे है जबकि इन्ही के समकक्ष काश्तकारो को दस बीघा कृषि भूमि और दो सौ वर्गमिटर का आवासीय भूखंड आवंटित किया गया था यानि संविधान के अनुच्छेद 14 का खुल्म खुला उलंघन किया गया।

उन्होने कहा कि विस्थापिति इलाकों में वर्षाें बीत जानें के बाद भी आवंटित भूमि पर भूमिधरी अधिकार नही मिल पाए, हरिद्वार ग्रामीण इलाकों पथरी भाग 1,2,3, 4में जमीनों पर भूमि धरी अधिकार नहीं दिए गए। टिहरी बांध जिन ग्रामीणों के खेत खलिहानो पर निर्मित है, बांध की झील के जलभराव से अब जिनके घर, आंगन, खेत खलिहान खतरे में है,उनके विस्थापन पर किंतु परंतु क्यों?

जिन कास्तकारो के पुस्तैनी मकानों में झील के जलस्तर के बढ़ने घटने के कारण भारी-भारी खतरनाक दरारें पड़ी हुई है, और कभी भी बड़े जान माल का नुकसान हो सकता है, उनकी विगत वर्षों से अब तक कोई सुध क्यो नहीं ली गई है, संयुक्त विशेषज्ञ समिति ने जिन ग्रामों/परिवारों को ओब्जार्वेशन में रखा था कोई टीम अभी तक अनुपालनार्थ क्यो नही आई? टिहरी बांध निर्माण से निर्मित रिजर्ववायर का जल स्तर बढ़ाने से भिलंगना घाटी के 19 गावों और भागीरथी घाटी के 25 गावों को अस्थिर होना पड़ रहा है, इनके विस्थापन्न का कार्य अभी लंबित है।

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