नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। संसद की श्रम समिति ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को वर्तमान 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की है।
महंगाई के मुकाबले नहीं है वर्तमान पेंशन
श्रम मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मिल रही 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन महंगाई के सामने बिल्कुल नाकाफी है। समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा कि “2014 से अब तक जीवनयापन की लागत में भारी वृद्धि हुई है, ऐसे में पेंशन की राशि में भी तदनुसार बढ़ोतरी होनी चाहिए।”
क्या है पूरा प्रस्ताव?
- वर्तमान न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश
- यह वृद्धि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली पेंशन पर लागू होगी
- प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर यह लाभ EPFO के सभी सदस्यों को मिलेगा
कैसे काम करता है पेंशन का यह सिस्टम?
प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन का 12% हिस्सा EPF खाते में जमा होता है। इसमें से 8.33% राशि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाती है, जो सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन के रूप में वापस मिलती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, कर्मचारियों को न्यूनतम 1,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलती है, जिसे बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
श्रम कानूनों के जानकार डॉ. राजीव शर्मा का कहना है कि “यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो यह निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय होगा। वर्तमान में मिल रही पेंशन राशि बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ है।”
अब निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह इस सिफारिश को कब और कैसे लागू करती है। श्रम मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले पर जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।