Saturday, March 14, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home मुख्य खबर

2024 का शोर, 80 पर जोर

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
24/01/23
in मुख्य खबर, राष्ट्रीय
2024 का शोर, 80 पर जोर

google image

Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

अशोक भाटिया


उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए मिशन-80 का लक्ष्य रखा है और पार्टी इस लक्ष्य को साधने में अभी से जुट गई है. अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर एक साल जैसे ही बढ़ा वो सबसे पहले उत्तरप्रदेश ही आए. उसमें भी उन्होंने पूर्वांचल को चुना. दरअसल दिल्ली में पार्टी की जो राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई उसमें उत्तर प्रदेश को लेकर नई रणनीति तैयार की गई है. जेपी नड्डा का यह दौरा उसी रणनीति का हिस्सा था. ढोल, नगाड़े और फूलों की वर्षा के साथ जेपी नड्डा के स्वागत में कार्यकर्ता उमड़े थे.

दरअसल राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा को एक साल का विस्तार दिया गया है. इसके तुरंत बाद जेपी नड्डा उत्तर प्रदेश के दौरे पर पहली बार गए. खुद मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और सरकार के कई मंत्री पार्टी के तमाम कार्यकर्ता उनका स्वागत में तैयार थे. एक तरह से पूर्वांचल में मेला लगा हुआ था. भाजपा मिशन-2024 में जुट गई है. उसकी शुरुआत पूर्वांचल से की गई है. जेपी नड्डा ने जब पहली जनसभा करने के लिए किसी जिले को चुना तो वह गाजीपुर है. क्योंकि 2019 में भाजपा इस सीट को नहीं जीत पाई थी. दिल्ली में पार्टी का दो दिनों तक जो मंथन हुआ था, उसमें भी सबसे ज्यादा जोर इसी बात पर दिया गया कि हारी हुई बाजी को कैसे जीता जाए यानी हारी हुई सीटों और कमजोर बूथ पर कैसे भाजपा को मजबूत किया जाए.

जेपी नड्डा का गाजीपुर आना उसी रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा. जेपी नड्डा सबसे पहले वाराणसी पहुंचे जो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और फिर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजन किया. यानी कहीं ना कहीं भाजपा का जो एजेंडा है उसे आगे बढ़ाएंगे और उसके बाद फिर वे गाजीपुर में जनसभा के लिए रवाना हो गए. उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का कहना है कि इस बार में भाजपा गुजरात विधानसभा चुनाव में जो जीत मिली है उस रिकॉर्ड को भी तोड़ेगी. गुजरात में इस बार भाजपा ने 86 फीसदी सीटें जीती हैं तो उत्तर प्रदेश के लिए भी कुछ उसकी ऐसे ही तैयारी है यानी अब तक सबसे ज्यादा सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाने की तैयारी. उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए ये महत्वपूर्ण भी है क्योंकि उसे पता है कि दक्षिण के राज्यों में अगर उसे कोई नुकसान हो तो उत्तर प्रदेश जहां लोकसभा की 80 सीटें हैं. वह उसे काफी हद तक सत्ता में आने में मदद कर सकता है.

इसलिए भाजपा ने पूरी ताकत उत्तरप्रदेश के लिए लगा दी है. भाजपा के लिए पूर्वांचल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में भाजपा के मुताबिक नतीजे नहीं आए थे और खासतौर से अगर गाजीपुर की बात करें तो यहां अंसारी फैक्टर भी हावी है और ओमप्रकाश राजभर भी प्रभावशाली भूमिका में है. ऐसे में भाजपा ने मिशन 80 की शुरुआत गाजीपुर से ही की है जिससे कि अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर बाकी की सीटों के लिए जुटा जाए. दरअसल लगातार तीसरी जीत के साथ हैट्रिक की तैयारी में लगी भाजपा कोई भी मौका चूकना नहीं चाहती है. 80 लोकसभा सीटों के साथ उत्तर प्रदेश की खासी अहमियत है. इसलिए प्रदेश पर जोर भी पूरा लगा हुआ है.

भाजपा ने देशभर की 144 लोकसभा सीटों के लिए यह प्लान तैयार किया है. केंद्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्व का 3 लेयर तैयार किया गया है. इसमें उत्तर प्रदेश पर स्पेशल फोकस रखा गया है. सबसे अधिक फोकस उन सीटों पर है, जहां 2019 में भाजपा को हार मिली थी. 2019 लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश की 80 में से भाजपा को 62 और सहयोगी पार्टी अपना दल को 2 सीटों पर जीत मिली थी. 16 सीटों पर भगवा दल को हार का स्वाद चखना पड़ा था. हालांकि इस साल जून में हुए उपचुनाव में आजमगढ़ और रामपुर सीट भी भाजपा के खाते में आ गई. अभी बसपा के पास 10, कांग्रेस के पास 1 और सपा के पास 3 सीटें हैं. अब भाजपा की तैयारी उन सीटों को जीतने की है, जहां पर हार का सामन करना पड़ा था.

जानकारी के अनुसार यह योजना भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी. एल. संतोष की दिमागी उपज है. सूत्रों के अनुसार 3 लेवल पर रणनीति तैयार की गई है. पहला लेवल केंद्रीय नेतृत्व का होगा, जिसमें अमित शाह, जे पी नड्डा और बी एल संतोष शामिल रहेंगे. ये नेता राज्य स्तर पर दूसरे लेवल के नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे. दूसरे लेवल में सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तरप्रदेश के भाजपा चीफ भूपेंद्र चौधरी, पार्टी महासचिव धर्मपाल सैनी जैसे नेता रहेंगे. इसमें अन्य राज्यों के नेता, पार्टी के पदाधिकारी मिलकर पार्टी की रणनीति को लागू कराने पर काम करेंगे. उत्तरप्रदेश की 80 लोकसभा क्षेत्रों में एक लाख 70 हजार से ज्‍यादा बूथ हैं और भाजपा ने अपने संगठनात्मक सर्वे में इनमें से 22 हजार बूथ को कमजोर माना है.

सूत्रों के मुताबिक ये बूथ खासतौर से यादव, जाटव और मुस्लिम बहुल हैं. भाजपा की यह रणनीति आरएसएस की योजना के अनुरूप ही बैठती है, जहां सीनियर नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को साथ मिलाकर टास्क को कोऑर्डिनेटेड तरीके से तैयार किया जाता है. पार्टी के एक नेता ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों को उनकी संबंधित लोकसभा इलाके में हर महीने दौरा और रात में रूककर योजनाओं को अमली जामा पहनाना जरूरी है. उनका फीडबैक पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. गौरतलब है कि योगी आदित्‍यनाथ ने हाल में हुए आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव जीतने के बाद दावा किया था कि साल 2024 में उत्तर प्रदेश की 80 में 80 लोकसभा सीटें जीतेंगे. इसके पहले भाजपा ने 80 में 75 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया था.

अब खासतौर से भाजपा उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीट जीतने के लिए यादव, जाटव (अनुसूचित जाति) और पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों को भी साधने में जुट गई है. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि साल 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुस्लिम और यादव ‘एमवाई’ समीकरण तथा बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत जाटव मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा पूरी ताकत से जुट गई है. भाजपा यादवों के साथ ही जाटवों को भी महत्व देने लगी है. इसके पहले भी पार्टी ने 2014 और 2019 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में गैर-जाटव अनुसूचित जातियों मसलन कोरी, धोबी, पासी, खटीक, धानुक आदि समाज के लोगों को विशेष वरीयता दी थी. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा दिलाकर भाजपा ने उन्‍हें राजनीति की मुख्यधारा में शामिल किया.

आगरा के जाटव समाज से आने वाली बेबी रानी को विधानसभा चुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी बनाया और चुनाव जीतने के बाद उन्‍हें योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया. वह भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं. जहां तक पसमांदा मुसलमानों का सवाल है तो भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की दूसरी सरकार में बलिया के अति पिछड़े मुस्लिम परिवार से आने वाले दानिश आजाद अंसारी को मंत्रिमंडल में शामिल किया और उन्‍हें अल्पसंख्यक मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया. अंसारी को जब मंत्री पद दिया गया तब वह विधानमंडल के किसी सदन के सदस्‍य भी नहीं थे, जिन्हें बाद में भाजपा ने विधान परिषद में भेजा. भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली हैं.

भाजपा के पास इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के रूप में जीत दिलाने वाले दो बड़े ट्रंप कार्ड मौजूद हैं. इसके अलावा केंद्र और उत्तरप्रदेश सरकार के कार्यों के कारण भी भाजपा को लगता है कि उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. केंद्र-उत्तरप्रदेश सरकारें लगातार सभी धर्मों-जातियों को अपने साथ जोड़कर अपना सामाजिक दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. जिस तरह उसकी सफलता का ग्राफ बढ़ रहा है, माना जा सकता है कि उसकी कोशिशें काम कर रही हैं. लोकसभा चुनाव के पूर्व जनवरी महीने में ही अयोध्या में राममंदिर भी बनकर तैयार हो जाएगा और आम लोग अयोध्या में रामलला के दर्शन कर सकेंगे. भाजपा नेताओं को यह भी उम्मीद है कि उसे मंदिर निर्माण की लोकप्रियता का लाभ मिल सकता है.

अमित शाह का राममंदिर निर्माण को लेकर हालिया बयान पार्टी की इसी रणनीति की ओर इशारा करता है. यदि जनता में राम मंदिर को लेकर विशेष उत्साह बना, तो भाजपा अपने असंभव से लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सकती है. उत्तर प्रदेश में भाजपा को टक्कर देने के लिए सपा भी अपने कील और कांटे दुरूस्त कर प्लान बनाने में लगी है.अखिलेश यादव रविवार को जब जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचे. यहां मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “भाजपा के पास कोई पार्क नहीं है. उन्हें जब ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो लोहिया पार्क में आते हैं.” वहीं, भाजपा के 80 सीटों के जीतने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हो सकता है 80 सीटें हार जाए. जो पार्टी यह कहती है वह बरसो रहेंगे.

वह लोग अब सिर्फ 400 दिन की बात कर रहे हैं. सपा ने भी बिन्दुवार मास्टर प्लान बनाया है उसके अनुसार हर लोकसभा सीट के 225 से 250 पोलिंग बूथ पर कर रहें फोकस करना, सपा के गढ़ को अभेद्य बनाना, विधानसभा बजट सत्र के बाद एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना, कार्यकर्ताओं को मजबूत करने का प्लान बनाया जा रहा हैं. ऐसे में अब देखने वाली बात ये होगी कि सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर पीएम नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा के सियासी बाणों की काट कैसे तैयार करते हैं. उन्होंने भी अपनी चुनावी रैलियों के दौरान सरकार बनने के तीन महीने के भीतर इसे शुरू करने का वादा किया था.

अपने हालिया तेलंगाना दौरे के बारे में अखिलेश यादव ने कहा कि वह वहां तेलंगाना के मुख्यमंत्री के निमंत्रण पर गए थे, उन्होंने कई अन्य मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया था. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आज गरीब या कोई भी न्याय की उम्मीद नहीं कर सकता. भाजपा निजीकरण की राह पर चल रही है, आज भाजपा उन कानूनों को बना रही है. जिससे सरकार निजी हाथों में चली जाए. इन समस्याओं को समाजवादी विचारधारा ही खत्म सकती है. अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास सिर्फ 398 दिन बचे हैं. उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस बार 80 सीटें हारेगी. सोशल इंजीनियरिंग के इस फार्मूले पर अमल करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती भी उत्तरप्रदेश में अपने खिसकते सियासी जनाधार को बचाने के लिए दलित, मुस्लिम और पिछड़े समाज का गठजोड़ बनाने में लगी हुई हैं.

अपने इस सियासी समीकरण को मजबूत करने के लिए मायावती ने सपा में अखिलेश यादव से नाराज नेताओं के लिए अपनी पार्टी के दरवाजे खोल दिए हैं. यही नहीं अखिलेश से खफा होकर बसपा का दामन थामने वाले सपा नेताओं को मायावती लोकसभा में चुनाव मैदान में उतारेंगी.यह संदेश मायावती भी ने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, इमरान मसूद और अतीक अहमद की पत्नी को बसपा में लाकर दे दिया है. अब मायावती की नजर सपा के उन नेताओं पर जम गई है, जो लोकसभा चुनाव लड़ने को इच्छुक हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने उन्हें अभी तक चुनाव मैदान में खड़ा करने का कोई आश्वासन नहीं दिया है. यह बात मायावती को पता है. उन्हें यह भी मालूम है कि उत्तरप्रदेश में मुस्लिम समाज की नजदीकी सपा के साथ ही है.

इसलिए बीते विधानसभा चुनावों में भी सपा को मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर बसपा से ज्यादा वोट मिले. ऐसे में सपा के मजबूत नेताओं को बसपा में लाकर मायावती फिर से पार्टी को एक मजबूत ताकत बनाने की जुगत में हैं. वास्तव में समाजवादी पार्टी में इस वक्त सीनियर नेताओं में जमकर गुटबाजी हो रही है. ऐसे ही गुटबाजी के चलते शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली और इमरान मसूद जैसे मजबूत नेता बसपा में आ गए. शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मायावती ने आजमगढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में चुनाव लड़ा दिया और मसूद अहमद की पत्नी को मायावती ने मेयर का चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया. प्रयागराज से भी मायावती ने अतीक अहमद की पत्नी को भी बसपा में लाकर प्रयागराज की मेयर सीट से चुनाव लड़ाने का संकेत दिया है. अब कहा जा रहा है कि संभल लोकसभा सीट से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क भी बसपा का दामन थामने की सोच रहे हैं. हाल फ़िलहाल उत्तर प्रदेश के तीनों बड़े दल 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे तो अब समय बताएगा कौन 80 सीटों पर काबिज होगा.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .