नैनीताल : नैनीताल हाईकोर्ट ने प्लास्टिक कचरे के निपटारे के लिए बनाए गए एप को जीओ टैगिंग से जोड़ने के साथ संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों के फोन, व्हाट्सएप नंबर इसमें सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि दो हफ्ते के भीतर एप में दर्ज शिकायतों का निस्तारण नहीं हुआ तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने राज्य में प्लास्टिक कचरे पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी से अब तक कूड़ा निस्तारण के लिए की गई कार्रवाई के बारे में भी पूछा और वन पंचायतों के नक्शे ऑनलाइन करने के भी निर्देश दिए हैं। अल्मोड़ा के हवालबाग निवासी जितेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में प्लास्टिक यूज और उसके निस्तारण के लिए नियमावली बनाई थी।
पर इनका पालन नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के नियम बनाए, जिसमें उत्पादकर्ता, परिवहनकर्ता और विक्रेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक वापस लाएंगे। अन्यथा इसके निस्तारण के लिए निकाय को फंड उपलब्ध कराएंगे। याचिका में कहा गया कि राज्य में इसका उल्लंघन किया जा रहा है और पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हैं।
कहीं से भी कर सकते हैं शिकायत दर्ज
मामले में पैरवी कर रहे दुष्यंत मैनाली ने कहा कि यह आदेश खासा महत्वपूर्ण है। इस आदेश के बाद राज्य में कहीं से भी शिकायत दर्ज की जा सकेगी। अगर समाधान नहीं होगा तो यह फोटो स्वत: ही उच्च अधिकारी के पास जाएगी जिसमें अधिकारी की कार्यप्रणाली से सवालों के घेरे के आ जाएगी।
