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सुभारती अस्पताल में हुआ राष्ट्रीय स्तर का नेत्र रोग कॉन्फ्रेंस का आयोजन

Frontier Desk by Frontier Desk
17/08/25
in देहरादून
सुभारती अस्पताल में हुआ राष्ट्रीय स्तर का नेत्र रोग कॉन्फ्रेंस का आयोजन
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डॉ० कृष्ण कुमार भटनागर के 99वें जंयती के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन
सुभारती आई बैंक एवं आई ट्रॉमा सेन्टर खोलने की हुई घोषणा

देहरादून। सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ० कृष्ण कुमार भटनागर के 99वें जंयती के उपलक्ष्य में गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ0 के0के0बी0एम0 सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून में एक विशेष नेत्र कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें प्रदेश के ही नहीं अपितु देश के विभिन्न राज्यों से विद्वान विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा नेत्र से संबंधित ज्ञानवर्धक जानकारी एवं अपने अनुभवों को साझा किया।

प्रस्तुत कार्यक्रम का प्रबन्धन उत्तराखण्ड नेत्र रोग विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ० राजेश तिवारी तथा मंच संचालन नेत्र विभाग की डॉ० तृप्ति चौधरी मोंगिया द्वारा किया गया। प्रथम सत्र में फ्री पेपर कॉम्पिटिशन एवं ई० पोस्टर कॉम्पिटिशन किया गया जिसमें दस प्रतिभागियो ने प्रतिभाग किया एवं डॉ० प्रियंका शरण मेरठ सुभारती को ई० पोस्टर अवार्ड दिया गया।

कार्यक्रम को आरम्भ करते हुए सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ० अतुल कृष्ण ने अपने संबोधन में अपने पिता डॉ० कृष्ण कुमार भटनागर के जीवन-परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डॉ० कृष्ण कुमार भटनागर का जन्म 16 अगस्त 1925 को श्री नन्दलाल भटनागर के घर पर हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक थे। बाद में वह मसूरी के नगरपालिका पोस्टग्रेजुएट विद्यालय के प्रधानाचार्य बने। वह 1989 में सेवानिवृत्त हुए अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होने 1951 में अपनी मृत्यु तक मसूरी में रहना जारी रखा।

डॉ० कृष्ण कुमार भटनागर एक बहुत ही सामाजिक रूप से संवेदनशील व्यक्ति थे। यह उनकी इच्छा थी कि डॉक्टर अतुल कृष्ण मसूरी तथा देहरादून में ही रहे। इसी कारण डॉ० अतुल कृष्ण देहरादून आए और यहाँ पर भी उन्होने रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय और गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय तथा उनकी स्मृति में डॉ० के०के०बी०एम० अस्पताल की स्थापना करी। डॉ० अतुल कृष्ण ने कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग करने वाले सभी डॉक्टरों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद देहरादून के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ० मनोज कुमार शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि उत्तराखण्ड शासन के संयुक्त निदेशक डॉ० जे०एस० नेगी रहे। सभी गणमान्य अतिथियों एवं अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई एवं मुख्य अतिथियों को शॉल उड़ाकर, स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

मेक्स अस्पताल, पंचशील (दिल्ली) से विशेष तोर पर आये वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ० देवेन्द्र सूद द्वारा “कोणीय बंद ग्लूकोमाः दैनिक अभ्यास में उलझनें“ पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया जिसमें बताया गया कि कोणीय बंद ग्लूकोमा, जिसे संकीर्ण-कोण ग्लूकोमा भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी आंख में जल निकासी कोण बंद हो जाता है, जिससे द्रव का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है जो स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकती है, खासकर यदि इसका तुरंत इलाज न किया जाए।

प्रो० डॉ० वी०के० मलिक द्वारा मोतियाबिंद के कठिन मामलों पर चर्चा की गई। सुभारती अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ० युसु़फ रिज़वी ने कहा कि नेत्र विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के एकीकरण ने इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा दिया है, जिससे निदान सटीकता, रोगी देखभाल और उपचार परिणामों को बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त हुए हैं।

इस शोध पत्र का उद्देश्य नेत्र विज्ञान में एआई अनुप्रयोगों की एक आधारभूत समझ प्रदान करना है, जिसमें एआई-संचालित निदान से संबंधित अध्ययनों की व्याख्या पर ध्यान केंद्रित किया गया है। हमारी चर्चा का मुख्य उद्देश्य विभिन्न एआई विधियों का अन्वेषण करना है, जिसमें इमेजिंग डेटा में नेत्र संबंधी विशेषताओं का पता लगाने और उनका परिमाणीकरण करने के लिए डीप लर्निंग (डीएल) ढाँचे, साथ ही सीमित डेटासेट में प्रभावी मॉडल प्रशिक्षण के लिए ट्रांसफर लर्निंग का उपयोग शामिल है।

प्रो० डॉ० रेनू धस्माना ने कार्यशाला को आगे बढ़ाते हुए अपने संबोधन में कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में रेटिनोपैथी एक ऐसी स्थिति है जिसमें आँखों की रेटिना में असामान्य रक्त वाहिकाएँ विकसित हो जाती हैं। यह स्थिति उन शिशुओं में अधिक आम है जिनका जन्म समय से पहले होता है और जिनका वजन कम होता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो समय से पहले जन्मे शिशुओं में होती है, जिसमें रेटिना में असामान्य रक्त वाहिकाएं विकसित हो जाती हैं।

डॉ० तृप्ती चौधरी ने बताया कि दुर्लभ मामलों में, ऑप्टिक न्यूरिटिस (ऑप्टिक तंत्रिका की सूजन) और पीआईएच (गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप) का संयोजन देखा जा सकता है। यह एक असामान्य स्थिति है जिसके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऑप्टिक न्यूरिटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें ऑप्टिक तंत्रिका में सूजन हो जाती है, जिससे दृष्टि में कमी या हानि हो सकती है। इसके लक्षणों में शामिल हैः दृष्टि में कमी या धुंधलापन, आंखों में दर्द, खासकर गति के साथ, रंग दृष्टि में परिवर्तन, फ्लैशिंग या टिमटिमाती रोशनी देखना।

डॉ० मानसी गौसाइं पोखरियाल ने बताया कि बैंग एक विशिष्ट प्रकार की गोनियोटॉमी है, जो एक शल्य प्रक्रिया है जो आँख से तरल पदार्थ के निकास को बेहतर बनाने के लिए ट्रेबिकुलर मेशवर्क को संशोधित करती है। इसमें एक मुड़ी हुई, 25-गेज की हाइपोडर्मिक सुई का उपयोग किया जाता है, जिसे एक छोटे से चीरे में डालकर ट्रेबिकुलर मेशवर्क के एक हिस्से को काटकर निकाला जाता है। इससे आँख के अंदर का तरल पदार्थ, एक्वेअस ह्यूमर, आँख के प्राथमिक जल निकासी चौनल, श्लेम कैनाल में अधिक स्वतंत्र रूप से प्रवाहित हो पाता है, जिससे आईओपी कम हो जाता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० हिमांशु ऐरन, प्राचार्य डॉ० देश दीपक, चिकित्सक अधीक्षक डॉ० (ले० कर्नल) राहुल शुक्ला, सहायक परियोजना निदेशक डॉ० लोकेश त्यागी, उप-प्रधानाचार्या डॉ० रूपा हंसपाल, प्रचार एवं मार्केटिंग प्रमुख डॉ० प्रशान्त कुमार भटनागर तथा डॉ० ललित मोहन सुन्द्रीयाल, डॉ० रितेश श्रीवास्तव, जितेन्द्र त्यागी, रवि मित्तल, आदित्य गौतम, सागर, सचिन कुमार, राहुल राणा तथा सभी विभागो के विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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