नई दिल्ली : राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Elections) से पहले राज्य में सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) कांग्रेस से नाता तोड़कर अपने रास्ते पर चलने को तैयार दिख रहे हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के साथ वर्चस्व की लड़ाई में उलझे पायलट, राज्य में चुनाव से कुछ महीने पहले अपनी खुद की पार्टी शुरू करने की कगार पर है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो इस प्रक्रिया में प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC पायलट की मदद कर रही है। माना जाता है कि I-PAC के वॉलंटियर्स ने 11 अप्रैल को उनकी एक दिन की भूख हड़ताल की योजना बनाने में पायलट की मदद की थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई न होने के खिलाफ ये हड़ताल की थी।
यही फर्म पायलट की पांच दिन की पदयात्रा की रूपरेखा बनाने में भी शामिल थी। तब उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक के मुद्दे पर कार्रवाई के लिए अजमेर से जयपुर तक पैदल यात्रा की थी।
15 मई को यात्रा के समापन पर, पायलट ने जयपुर के बाहरी इलाके में एक रैली को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने गहलोत सरकार से तीन मांगें रखी थीं, वो तीन मांग थीं-
- राजे सरकार के दौरान कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई।
- राजस्थान लोक सेवा आयोग का पुनर्गठन
- परीक्षा पेपर लीक से प्रभावित युवाओं को मुआवजा
उन्होंने मांगों को पूरा करने के लिए 31 मई की समय सीमा तय की थी, मांगें पूरी नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की धमकी दी थी। ऐसी अटकलें हैं कि पायलट 11 जून को अपने पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर एक बड़ी घोषणा करने की तैयारी में हैं। इस अवसर पर पायलट एक रैली करने वाले हैं और समझा जाता है कि वे तब अपनी पार्टी के लॉन्च की घोषणा करने की योजना बना रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये भी पता चला है कि नई पार्टी का नाम ‘प्रगतिशील कांग्रेस’ (Pragatisheel Congress) हो सकता है।
29 मई को पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक के बाद केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से गहलोत और पायलट का एक फोटो सेशन कराने के बावजूद, राज्य कांग्रेस में गहरी खाई दिखाई दे रही है। पायलट ने 31 मई को अपने निर्वाचन क्षेत्र टोंक के दौरे के बीच मीडिया से कहा था कि वह गहलोत सरकार के लिए रखी गई तीन मांगों से कोई समझौता नहीं कर सकते।