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2023 में बिछेगी 2024 की सियासी बिसात

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
31/12/22
in मुख्य खबर, राष्ट्रीय
2023 में बिछेगी 2024 की सियासी बिसात
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नई दिल्ली। नए साल का आगाज होने वाला है और इसी के साथ यह नव वर्ष राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि साल 2023 विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी जंग का अखाड़ा बनने वाला है। यह साल आने वाले समय में 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए टोन सेट करने की भी संभावना रखता है।

पूर्वोत्तर से पश्चिम तक होंगे चुनाव

2023 में देश के पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिम और दक्षिण से लेकर मध्य भाग तक कम से कम नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। आने वाला साल बीजेपी विरोधी पार्टियों के लिए भी अहमियत रखता है, जो एकजुट होने के लिए मुखर रही हैं।

इन राज्यों में होंगे चुनाव

2023 में राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में विधानसभा (Assembly Elections 2023) चुनाव होने वाले हैं। इसके अलावा अगर सब कुछ ठीक रहा तो सरकार अगले साल जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव भी करा सकती है। इस लिहाज से 2023 के चुनावी मुकाबलों को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा सकता है।

कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी

यह नया साल कांग्रेस पार्टी के लिए भी काफी अहम होने वाला है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ दो ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस की सरकार है। इसलिए यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई चल रही है, जिसे हाल ही में हुए हिमाचल चुनावों में जीत के बाद कुछ हद तक राहत की सांस मिली है।

राजस्थान में गहलोत और पायलट में अनबन बनेगी सिरदर्द!

राजस्थान में कांग्रेस ने 2018 में 200 सीट वाली विधानसभा में 100 सीटें जीतकर भाजपा से सत्ता छीनी थी। 2013 में 163 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली बीजेपी को 2018 में सिर्फ 73 सीटें ही मिली थी। राज्य में 2023 में फिर से भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। राजस्थान में 1990 से सत्ता कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस के हाथ रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अनबन की बातें कांग्रेस के लिए सिरदर्द साबित हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश में कांग्रेस फिर बनना चाहेगी सबसे बड़ी पार्टी 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भाजपा के 15 साल के राज को खत्म करते हुए 90 सदस्यीय विधानसभा में 68 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। बीजेपी को सिर्फ 15 सीटें मिली थीं। हाल ही में हुए भानुप्रतापपुर उपचुनाव में भी सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सीट बरकरार रखी। वहीं, मध्य प्रदेश में 2018 में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद एक बड़ा राजनीतिक नाटक देखा गया जब कमलनाथ भाजपा के 15 साल के शासन को खत्म कर मुख्यमंत्री बने। हालांकि, शिवराज सिंह चौहान दो साल बाद सत्ता में लौट आए दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 मौजूदा विधायकों ने भाजपा में शामिल होकर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। अब इन दोनों राज्यों में भी 2023 चुनावी साल है।

एकमात्र दक्षिण राज्य को बचाना चाहेगी भाजपा 

कर्नाटक में भी 2023 में चुनाव होने हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के बाद सियासी बवाल मच गया था। त्रिशंकु विधानसभा के बाद बीएस येदियुरप्पा को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण इस्तीफा दे दिया। बाद में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने मुख्यमंत्री के रूप में एचडी कुमारस्वामी के साथ सरकार बनाने के लिए गठबंधन किया था। हालांकि, 14 महीने बाद, सत्तारूढ़ गठबंधन के एक दर्जन से अधिक विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप कुमारस्वामी सरकार गिर गई। जुलाई 2019 में, बीएस येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री के रूप में लौटे। हालांकि, बीजेपी ने पिछले साल जुलाई में येदियुरप्पा की जगह बसवराज बोम्मई को सीएम बना दिया था। कर्नाटक भाजपा के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह दक्षिण का एकमात्र राज्य है जहां पार्टी का शासन है।

तेलंगाना में एंट्री की कोशिश में भाजपा

तेलंगाना के गठन के बाद से चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) सत्ता में है। अब राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के साथ केसीआर ने केंद्र में मोदी सरकार का मुकाबला करने के लिए भारत राष्ट्र समिति के रूप में अपनी पार्टी को फिर से लॉन्च किया है। दूसरी तरफ बीजेपी तेलंगाना में पैठ बनाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। हालांकि अब देखना यह होगा कि साल 2023 में होने वाले चुनाव में इस राज्य में भाजपा कैसा प्रदर्शन करती है।

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