चुनावों में मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक दलों की ओर से की जाने वालीं लुभावनी चुनावी घोषणाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई सिंगापुर भेजने का वादा करे तो हम क्या कर सकते हैं। वहीं इस मामले पर बुधवार को फिर से सुनवाई होगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इस मामले में सभी राजनीतिक दल एक तरफ हैं।हर कोई चाहता है कि फ्रीबीज जारी रहे।
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना ने कहा कि सवाल यह है अदालत के पास शक्ति है आदेश जारी करने कि लेकिन कल को किसी योजना के कल्याणकारी होने पर अदालत में कोई आता है कि यह सही है। CJI ने कहा कि ऐसे में यह बहस खड़ी होगी कि आखिर न्यायपालिका को क्यों हस्तक्षेप करना चाहिए? CJI ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से राय मांगी।
CJI ने कहा कि फ्रीबिज पर रोक के लिए हम चुनाव आयोग को कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं देने जा रहे हैं लेकिन इस मामले में चर्चा की जरूरत है। CJI ने कहा कि मान लीजिए केंद्र एक ऐसा कानून बनाता है जो राज्य मुफ्त नहीं दे सकते, क्या तब हम यह भी कह सकते हैं कि इस तरह का कानून न्यायिक जांच के लिए खुला नहीं है। केंद्र कि ओर से SG तुषार मेहता ने कहा कि जब सरकार के पास पैसा ना हो और वह चुनाव जीतने के लिए खर्च करे। क्या यह सही है? इसकी वजह से अर्थव्यवस्था लचर हो जाती है। यह गंभीर मुद्दा है। याचिकाकर्ता की ओर से विकास सिंह ने कहा कि अगर मुफ्त की घोषणाएं होती रहेंगी तो श्रीलंका जैसे हालात हो जाएंगे। सिंह ने कहा कि मुफ्त की योजनाओं के लिए पैसे कहां से आएंगे?
