रुड़की धर्म संसद को लेकर SC ने राज्य सरकार को चेताया, कहा- उच्चाधिकारी होंगे जिम्मेदार

रुड़की l उत्तराखंड की रुड़की में 27 अप्रैल को होने जा रही धर्म संसद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार का चेताया है. कोर्ट ने कहा कि अगर वहां भी समुदाय विशेष के खिलाफ कोई आपत्तिजनक बयानबाजी होती है तो इसके लिए राज्य के उच्च अधिकारी जिम्मेदार होंगे.

चीफ सेक्रेटरी दायर करें हलफनामा
कोर्ट ने राज्य के चीफ सेक्रेटरी से इस पर हलफनामा भी दायर करने को कहा है कि वहां ग़लत होने से रोकने के लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए गए हैं. इसके अलावा कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश ऊना में 17 से 19 अप्रैल के बीच हुई को लेकर राज्य सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा है. राज्य सरकार को बताना है कि भड़काऊ बयानबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पुराने निर्देश के मुताबिक, उनकी ओर से क्या कदम उठाए गए हैं.

धर्म संसद को लेकर दायर याचिका
सुप्रीम कोर्ट देश के विभिन्न हिस्सों में हुई धर्म संसद के दौरान विशेष समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाज़ी की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ताओ ने हरिद्वार, दिल्ली (Delhi), ऊना और अब रुड़की में होने वाली धर्म संसद का मसला कोर्ट के सामने रखा है.

हिमाचल सरकार से जवाब तलब
आज जब मामला सुनवाई के लिए आया तो याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि देश भर में ऐसी धर्म संसद आयोजित हो रही है. हिमाचल के ऊना में 17 से 19 अप्रैल के बीच धर्म संसद हुई. हमने एसपी और कलेक्टर को इसे रोकने के लिए बोला लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. सुनवाई के दौरान हिमाचल सरकार (Himachal Government) वकील की ओर से कोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की गई कि उन्होंने इस धर्म संसद के होने से पहले और बाद में ज़रूरी कदम उठाए. कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा.

रुड़की धर्म संसद को लेकर कोर्ट की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश के बाद कपिल सिब्बल ने रुड़की में 27 अप्रैल को होने वाली धर्म संसद का मामला उठाया. राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि उन्होंने भड़काऊ भाषण को लेकर दोनों समुदाय के खिलाफ FIR दर्ज की है और याचिकाकर्ता एक समुदाय को लेकर धारणा बनाना चाह रहे हैं. राज्य सरकार के वकील ने ये भी कहा कि वो किसी धर्म संसद पर पहले से रोक नहीं लगा सकते और ये अनुमान लगाना मुश्किल है कि इस दरमियान वहां क्या बयानबाजी होगी.

राज्य सरकार की है जिम्मेदारी
इस पर कोर्ट ने ऐतराज जाहिर करते हुए कहा कि अगर इस धर्म संसद में वही लोग आमंत्रित है, जो पहले भड़काऊ बयानबाजी कर चुके है तो राज्य सरकार की ये जिम्मेदारी बनती है कि वो वहां फिर से ऐसी बयानबाजी को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए. कोर्ट ने राज्य सरकार से वकील से कहा कि अगर फिर से ऐसी घटनाएं होगी तो हम राज्य के चीफ सेकेट्री को तलब करेंगे. कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से भी 7 मई से पहले हलफनामा दायर करने को कहा है. राज्य सरकार को बताना है कि रुड़की धर्म संसद में आशंकित अप्रिय बयानबाजी को रोकने के उन्होंने क्या कदम उठाए हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *