Thursday, March 19, 2026
नेशनल फ्रंटियर, आवाज राष्ट्रहित की
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार
No Result
View All Result
नेशनल फ्रंटियर
Home मुख्य खबर

तमिलनाडु के राज्यपाल बोले- धर्मनिरपेक्षता भारतीय नहीं, यूरोपीय अवधारणा है!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
24/09/24
in मुख्य खबर
तमिलनाडु के राज्यपाल बोले- धर्मनिरपेक्षता भारतीय नहीं, यूरोपीय अवधारणा है!
Share on FacebookShare on WhatsappShare on Twitter

नई दिल्ली: तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने एक बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता यानी सेक्युलरिज्म एक यूरोपीय कॉन्सेप्ट है, जो चर्च और राजा के बीच संघर्ष के बाद विकसित हुई जबकि भारत एक धर्म-केंद्रित राष्ट्र है और इसलिए यह संविधान का हिस्सा नहीं था. बाद में इसे आपातकाल के दौरान ‘एक असुरक्षित प्रधानमंत्री’ द्वारा जोड़ा गया था.

धर्मनिरपेक्षता पर क्या बोले

उन्होंने रविवार को कन्याकुमारी जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लोगों के साथ बहुत धोखाधड़ी की गई है और उनमें से एक धर्मनिरपेक्षता की गलत व्याख्या है. उन्होंने कहा, ‘धर्मनिरपेक्षता से क्या आशय है. धर्मनिरपेक्षता एक यूरोपीय अवधारणा है. धर्मनिरपेक्षता भारतीय अवधारणा नहीं है.’

राज्यपाल ने आरोप लगाया कि दशकों बाद आपातकाल (1975-77) के दौरान, ‘एक असुरक्षित प्रधानमंत्री’ ने लोगों के कुछ वर्गों को खुश करने के लिए संविधान में धर्मनिरपेक्षता का प्रावधान किया. आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं.

उन्होंने आगे कहा कि यूरोप में धर्मनिरपेक्षता का उदय तब हुआ, जब चर्च और राजा के बीच लड़ाई हुई और लंबे समय तक चले इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए इस अवधारणा का विकास किया गया. संविधान सभा की चर्चा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां इस बात पर विचार-विमर्श किया गया था कि भारत धर्म का देश है. उन्होंने कहा, ‘धर्म से टकराव कैसे हो सकता है? भारत धर्म से दूर कैसे हो सकता है? ऐसा हो ही नहीं सकता!’

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About

नेशनल फ्रंटियर

नेशनल फ्रंटियर, राष्ट्रहित की आवाज उठाने वाली प्रमुख वेबसाइट है।

Follow us

  • About us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Sitemap

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .

  • होम
  • मुख्य खबर
  • समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • विंध्यप्रदेश
    • व्यापार
    • अपराध संसार
  • उत्तराखंड
    • गढ़वाल
    • कुमायूं
    • देहरादून
    • हरिद्वार
  • धर्म दर्शन
    • राशिफल
    • शुभ मुहूर्त
    • वास्तु शास्त्र
    • ग्रह नक्षत्र
  • कुंभ
  • सुनहरा संसार
  • खेल
  • साहित्य
    • लेख
    • कला संस्कृति
  • टेक वर्ल्ड
  • करियर
    • नई मंजिले
  • घर संसार

© Copyright 2025 Uma Shankar Tiwari - All Rights Reserved .