पौड़ी : उत्तराखंड के पौड़ी जिले में सिद्धपीठ थानेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है। इस प्राचीन मंदिर के अंदर पत्थर का वर्षों पुराना शिवलिंग है। श्रावण माह में जलाभिषेक व पूजा अर्चना को स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि दूसरे क्षेत्रों से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं यहां खड़ा दिया अनुष्ठान कर मन्नत मांगती हैं।
श्रावण माह में भक्तों का लगा रहता है तांता
सिद्धपीठ थानेश्वर महादेव मंदिर पौड़ी में प्रमुख मंदिरों में एक है। मुख्यालय पौड़ी से यहां की दूरी करीब 42 किमी है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कल्जीखाल के थनुल गांव से करीब दो किमी की दूरी तय कर पहुंचा जा सकता है। मंदिर में श्रावण माह में भक्तों का तांता लगा रहता है। काफी संख्या में श्रद्धालुगण पहुंचते हैं।
मंदिर का इतिहास
मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां प्राचीन काल में कभी शिवलिंग ने था यानी विश्राम किया था। इसलिए इस मंदिर का नाम थानेश्वर महोदव मंदिर पड़ा। बताया जाता है कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की। सिद्धपीठ में बैकुंठ चतुर्दशी के मौके पर भव्य मेला लगता है। इस दौरान संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं खड़ा दिया अनुष्ठान कर मन्नत मांगती हैं।
मंदिर की विशेषता :
इस प्राचीन मंदिर के अंदर पत्थर का वर्षों पुराना शिवलिंग है। शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालु इस पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर चारों ओर से हरे भरे जंगलों के बीच स्थित है। इसके अलावा पूरा मंदिर परिसर खुला है। यहां से करीब तीन किमी की पैदल दूरी तय कर सड़क मार्ग से वाहन के जरिए बिलखेत-सतपुली या देवप्रयाग पहुंचा जा सकता है।
थानेश्वर महादेव का मंदिर एक सिद्वपीठ है। यहां जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने से मनौतियां पूरी होती है। श्रावण मास में सोमवार को जलाभिषेक के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालुगण पहुंचते हैं।
