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यह होता है देश की गरिमा बढ़ाना, जयशंकर ने पश्चिम को क्या खूब सुनाया

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
05/03/24
in अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय
यह होता है देश की गरिमा बढ़ाना, जयशंकर ने पश्चिम को क्या खूब सुनाया
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नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जब यूरोपीय देशों ने रूस से सस्ते तेल की खरीद पर सवाल पूछा था तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया था। एस. जयशंकर ने कहा था कि यूरोप और पश्चिम के अन्य देशों को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्हें खुद देखना चाहिए कि वे कितना तेल रूस से खरीदते हैं। उसके बाद भारत के बारे में बात करनी चाहिए। इसे लेकर अब रूसी विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव ने उनकी जमकर तारीफ की है। रूस के ही सोची में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एस. जयशंकर ने जिस तरह का जवाब दिया, उससे देश की गरिमा बढ़ती है। उनकी इस टिप्पणी का वीडियो रूसी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक ने शेयर किया है।

लावरोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मेरे मित्र सुब्रमण्यम जयशंकर यूएन में एक स्पीच दे रहे थे। इस दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर आप इतनी बड़ी मात्रा में रूस से तेल क्यों खरीद रहे हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि आप लोगों को अपना काम देखना चाहिए। आपको यह भी देखना होगा कि पश्चिम के देश कितना तेल रूस से लगातार खरीद रहे हैं। यह होता है देश की गरिमा बढ़ाना।’ इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी कई बार भारतीय विदेश नीति की तारीफ कर चुके हैं। वह पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की नीति को संप्रभुता की मिसाल बता चुके हैं।

बता दें कि भारत की ओर से तेल खरीद के सवाल जयशंक ने दोटूक कहा था कि आपको अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि लंबे समय से यह माइंडसेट रहा है कि यूरोप की समस्या तो पूरे दुनिया की समस्या है, लेकिन दुनिया की समस्या यूरोप की नहीं है। यही नहीं उन्होंने देश हित का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि हम अपने देशवासियों को यदि महंगाई के बोझ से बचा सकते हैं तो ऐसा क्यों न करें। बता दें कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से अमेरिका, यूरोप समेत कई देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे।

पाकिस्तान ने भी की थी भारत की इस डील की तारीफ

ऐसे में इन देशों की उम्मीद थी कि भारत भी रूस से तेल की खरीद न करे और व्यापार ठप कर दे, लेकिन भारत ने सब्सिडी पर सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। इसके चलते भारत को कोरोना काल में उस वक्त मदद मिली, जब अर्थव्यवस्था ढलान पर थी। तब भारत को सस्ते तेल के चलते महंगाई पर लगाम कसने में थोड़ी मदद मिली। भारत की इस नीति को तो पाकिस्तान ने भी तारीफ की थी और रूस से सस्ता तेल खरीदने के प्रयास किए थे।

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