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Home उत्तराखंड

कहीं कर्ज के बोझ से कंगाल न हो जाए उत्तराखंड!

Jitendra Kumar by Jitendra Kumar
11/04/22
in उत्तराखंड, देहरादून
कहीं कर्ज के बोझ से कंगाल न हो जाए उत्तराखंड!

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देहरादून: हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका कर्ज में डूबने की वजह से खराब आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है। श्रीलंका का जिक्र आज इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि भारत के कई राज्य भी कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। जिनमें अपना उत्तराखंड भी शामिल है।

एक विश्लेषण के मुताबिक साल 2021-22 तक राज्य सरकार पर 73,477.72 करोड़ रुपये का कर्ज था। अगले पांच वर्ष में अनुमान है कि राज्य सरकार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 54,496 करोड़ रुपये का और कर्ज ले सकती है। जीएसटी से अगले पांच साल में करीब 6720 करोड़ रुपये से 10574 करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। जबकि इस अवधि में कर्ज का अनुमान प्रति वर्ष 8982 करोड़ से लेकर 12994 करोड़ रुपये है। इस तरह उत्तराखंड राज्य पर अगले तीन साल में कर्ज का बोझ बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा।

इस वक्त राज्य सरकार के कुल बजट का 50 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च हो रहा है। वर्ष 2016-17 तक इस खर्च का अनुपात राजस्व व्यय का 50 प्रतिशत था, जो सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद 55 फीसदी तक हो गया। 2022-23 के बजट में इसके 54.83 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। इस वित्तीय वर्ष में 21,867 करोड़ रुपये वेतन एवं पेंशन पर खर्च का अनुमान है। आर्थिक मामलों के जानकार कहते हैं कि कर्ज के दबाव को कम करने का सिर्फ यही विकल्प है कि सरकार आय के दूसरे साधनों पर काम करे और खुद के संसाधनों से आय बढ़ाए। इसके अलावा केंद्र सरकार से ज्यादा से ज्यादा अनुदान हासिल करने के लिए प्रयास करने होंगे।

राज्य सरकार ने केंद्र पोषित योजनाओं में अगले पांच साल में करीब 86 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त करने का अनुमान लगाया है। पांचवें राज्य वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश सरकार की वित्तीय स्थिति का जो अनुमान लगाया है, वह राज्य के नीति नियामकों के लिए चौकस रहने का एक संकेत है।

कर्ज लेने का पूर्वानुमान क्या कहता है? जरा ये भी जान लीजिए
2022-23 में 8982 करोड़ कर्ज का पूर्वानुमान है।
2023-24 में 9855 करोड़ कर्ज का पूर्वानुमान है।
2024-25 में 10810 करोड़ कर्ज का पूर्वानुमान है।
2025-26 में 11855 करोड़ कर्ज का पूर्वानुमान है।
2026-27 में 12994 करोड़ कर्ज का पूर्वानुमान है।
(नोट: 2021-22 तक 73,477.72 करोड़ का कर्ज हो चुका है)

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