वसुंधरा पाण्डेय
प्यास गहरी है और
आंखे नम..
आस गहरी है,
दो बूंद पानी,
जिह्वा कह रही है..
प्यास
नम जगह तलाश करती है
कितना मुश्किल है
आंखों से होठो तक की दूरी
नापना।
…तभी तो हम रोज़ अश्क़ों को पिया करते हैं।
वसुंधरा पाण्डेय
प्यास गहरी है और
आंखे नम..
आस गहरी है,
दो बूंद पानी,
जिह्वा कह रही है..
प्यास
नम जगह तलाश करती है
कितना मुश्किल है
आंखों से होठो तक की दूरी
नापना।
…तभी तो हम रोज़ अश्क़ों को पिया करते हैं।
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