क्या है सिंधु जल संधि, भारत और पाकिस्तान ने इस पर हस्ताक्षर क्यों किये?

नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हैं। भारत ने इस जल संधि की समीक्षा के लिए पाकिस्तान को इस साल 30 अगस्त को औपचारिक तौर पर नोटिस भेजा था। नोटिस में इस संधि की समीक्षा और संशोधन करने के लिए कहा गया था। लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि वह इस जल संधि को बेहद महत्वपूर्ण मानता है और उम्मीद करता है कि भारत इस जल संधि के तहत किए गए समझौते के प्रावधानों का पालन करेगा।

19 सितंबर, 1960 को पाकिस्तान के कराची में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मार्शल मोहम्मद अयूब खान ने सिंधु नदी को लेकर यह समझौता किया था।

क्या है सिंधु नदी?

सिंधु नदी सिंधु घाटी सभ्यता का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। यह नदी दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है और कश्मीर से होते हुए और पंजाब के खेतों में बहते हुए अरब सागर में चली जाती है। इस नदी की मुख्य सहायक नदियों में झेलम, चिनाब, रावी और ब्यास शामिल हैं।

क्या है विवाद?

‘Indus Divided: India, Pakistan and the River Basin Dispute’ शीर्षक से अपनी किताब में पर्यावरणविद इतिहासकार डेनियल हैंस बताते हैं कि 1948 का साल पाकिस्तान के पश्चिमी पंजाब के लोगों के लिए चुनौतियों से भरा हुआ था। वे सिंचाई के लिए कृत्रिम रूप से बनाई गई नहरों पर निर्भर थे। तब वहां के लोग पूछते थे कि उन्हें नहर का पानी कब मिलेगा।

लेकिन ऐसे हेडवर्क्स जो इंजीनियरों को इन नहरों में नदी के पानी को मोड़ने की इजाजत देते थे, पूर्वी पंजाब में स्थित थे और इनकी वजह से भारत को पाकिस्तान की जल आपूर्ति पर नियंत्रण हासिल हुआ।

भारत के नेताओं ने अपने क्षेत्र में आने वाली सभी नदियों के पानी पर पूरा हक जताया। उनका कहना था कि भारत के इंजीनियर सतलुज नदी के साथ जो चाहते थे वैसा कर सकते थे। सतलुज नदी से पंजाब की नहरों को पानी मिलता था। लेकिन पाकिस्तान ने सतलुज के पानी पर अपना दावा किया क्योंकि यह पाकिस्तान की दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं- रावी पर माधोपुर और सतलुज पर फिरोजपुर के लिए जरूरी था और ये दोनों ही नदियां भारत में स्थित हैं।

धीरे-धीरे यह विवाद बढ़ गया और इसमें सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज नदियां भी शामिल हो गईं। 1947 में भारत के विभाजन के बाद जो नई अंतर्राष्ट्रीय सीमा बनी उसने उत्तरी-पहाड़ी इलाकों का बंटवारा कर दिया। दक्षिणी डेल्टा से ज्यादातर नदियों का पानी निकलता है लेकिन ये नदियां भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की वजह बन गई।

इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (वर्ल्ड बैंक) की लंबी कोशिशों के बाद 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों- सतलुज, ब्यास और रावी पर एकाधिकार मिला जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर अधिकार मिला।

युद्ध के बाद भी किया समझौते का पालन

सिंधु जल समझौता इसलिए किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद ना हो। सिंधु जल समझौते की इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति बनाए रखने में अहम भूमिका है। यह दोनों ही देश परमाणु हथियारों से लैस हैं और 1965 और 1971 के युद्ध के बावजूद दोनों देशों ने इस संधि का लगातार पालन किया है।

हालांकि पाकिस्तान भारत की दो जल विद्युत परियोजनाओं- किशनगंगा परियोजना और रतले परियोजना को लेकर आपत्ति जताता रहा है और इस वजह से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी है। पाकिस्तान का आरोप है कि दोनों परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *