वरुण गांधी का भाजपा में क्या भविष्य?

नई दिल्ली : क्या भाजपा सांसद वरुण गांधी अपनी राहें पार्टी से अलग कर रहे हैं? क्या वह कांग्रेस में अपना भविष्य तलाश रहे हैं? यह कुछ सवाल हैं, जो हर दिन के साथ लगातार तेज होते जा रहे हैं। इन सवालों के पीछे कुछ बेहद अहम वजहें हैं। इसमें सबसे अहम वजह है कि बीते कुछ वक्त में वरुण गांधी भाजपा के खिलाफ लगातार मुखर होते गए हैं। अगर देखा जाए तो किसी भी अन्य भाजपाई नेता या सांसद ने उस अंदाज में पार्टी का विरोध नहीं किया है, जिस तरह से वरुण गांधी कर रहे हैं। ऐसा कुछेक बार नहीं, बल्कि कई बार हो चुका है और यही वजह है कि उन्हें पार्टी में भी साइडलाइन कर दिया गया है। आइए एक नजर डालते हैं उन बातों पर जो दिखाती हैं कि क्यों वरुण गांधी भाजपा से दूर हो सकते हैं…

भाजपा में भविष्य पर भी सवाल
अगर भाजपा में वरुण गांधी के भविष्य की बात करें तो यह कहीं से भी उज्जवल दिखाई नहीं पड़ता। पिछले साल भाजपा ने वरुण को नेशनल एग्जीक्यूटिव से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस बात के भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में शायद भाजपा उन्हें टिकट भी न दे। भाजपा संगठन की बात करें तो यहां पूरी तरह से नरेंद्र मोदी और अमित शाह का वर्चस्व है। ऐसे में भविष्य में उन्हें संगठन में भी कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, इसके आसार भी बेहद कम हैं। वहीं, किसान आंदोलन के वक्त वरुण जमकर केंद्र सरकार के खिलाफ बरसे थे। उन्होंने सोशल मीडिया के साथ-साथ अखबारों में भी सरकार के खिलाफ लेख लिखे थे। यह बात भी उनके खिलाफ जा सकती है।

नरेंद्र मोदी की गुडबुक में नहीं?

बता दें कि वरुण गांधी सुल्तानपुर से भाजपा सांसद हैं और उनकी मां मेनका गांधी पीलीभीत से सांसद हैं। मोदी सरकार में मेनका गांधी को तो मंत्री बनाया गया था, लेकिन वरुण को तवज्जो नहीं दी गई थी। नरेंद्र मोदी सरकार में वरुण गांधी को तवज्जो न मिलने के पीछे एक खास वजह बताई जाती है। जी न्यूज के मुताबिक बात उस वक्त की है जब नरेंद्र मोदी दिल्ली की सियासत में एंट्री की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान वरुण गांधी ने लालकृष्ण आडवाणी के लिए यूपी में एक रैली आयोजित की थी। यह रैली आडवाणी की ताकत दिखाने के मकसद से आयोजित की गई थी। बताया जाता है कि इसके बाद से ही वरुण गांधी नरेंद्र मोदी की गुडबुक से बाहर हो गए। इसी का नतीजा था कि जब मोदी की सरकार बनी तो मेनका को तो मंत्री पद मिला, लेकिन वरुण उसमें एंट्री नहीं पा सके।

कांग्रेस की तरफ रुख की तैयारी?
वरुण गांधी साल 2004 में भाजपा में शामिल हुए थे। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 24 साल थी। अब जबकि भाजपा में रहते हुए वरुण लगातार भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं तो ऐसा अनुमान लगने लगा है कि वह कांग्रेस का रुख कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है यह है कि वह गांधी-नेहरू परिवार से ही जुड़े हैं। हालांकि एक वक्त था जब भारतीय राजनीति में वरुण गांधी बनाम राहुल गांधी का माहौल बनाने की कोशिशें भी हुई थीं। लेकिन गौर करने वाली बात है कि वरुण गांधी ने आज तक न तो राहुल गांधी और न ही सोनिया गांधी के खिलाफ कोई नकारात्मक बात कही है। इससे भी संकेत मिलते हैं उनके लिए कांग्रेस में शामिल होने का रास्ता आसान हो सकता है।

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