हल्द्वानी। सरकार प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे सभी विद्यार्थियों को तीन महीने बीतने के बावजूद टैबलेट नहीं दे पाई है। इनमें करीब 35 हजार ऐसे विद्यार्थी शामिल हैं जिन्होंने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद प्रवेश लिया था। इन छात्र-छात्राओं का उच्च शिक्षा निदेशालय ने कॉलेजों से आंकड़ा मांगा था। लेकिन तीन महीने का समय गुजर जाने के बाद भी इस विषय में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
निदेशालय की ओर से शासन को दो बार प्रस्ताव भेज दिया है। मगर निदेशालय के पत्र फाइलों में बंद हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 120 स्नातक और परास्नातक स्तर के कॉलेजों के एक लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को नि:शुल्क टैबलेट योजना का लाभ मिलना था। इसके लिए 108 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई थी।
विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 12 हजार रुपये की रकम टैबलेट खरीदने को मिलनी थी। प्रदेश सरकार ने 8 जनवरी को दोपहर में योजना लॉन्च की थी। साथ ही शासनादेश में 4 जनवरी से पहले कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को लाभ देने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में जनवरी के बाद प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को भी योजना से जोड़ने की कवायद निदेशालय स्तर से हुई थी। जानकारी के अनुसार कॉलेजों ने अभी तक 75 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को टैबलेट की रकम जारी कर दी है।
सत्र 2021-22 हो चुका सम्पन्न
डिग्री कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया भले ही जनवरी माह के बाद तक चली हो, लेकिन शिक्षा सत्र 2021-22 सम्पन्न हो चुका है। कुमाऊं विवि सहित अन्य विश्वविद्यालयों की वार्षिक परीक्षा होने के साथ अब नए सत्र की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन पिछले सत्र में देरी से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को टैबलेट योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि कई कॉलेजों की ओर से ऐसे विद्यार्थियों से आवेदन ले लिए गए थे। अब विद्यार्थी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
